आरा-बलिया के बीच बनेगा 1564 करोड़ का फोरलेन और गंगा पुल; 100 की जगह 30 KM में सिमटेगी दूरी
आरा और बलिया के बीच 1564 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फोरलेन और गंगा पुल परियोजना के लिए निविदा जारी हो गई है। यह पुल दोनों शहरों के बीच की दूरी क ...और पढ़ें

बिहार-यूपी के बीच गंगा पर बनेगा पुल। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
1564 करोड़ की लागत से आरा-बलिया फोरलेन और गंगा पुल।
यात्रा दूरी 100 किमी से घटकर लगभग 30 किमी होगी।
NHAI ने परियोजना के लिए निविदा जारी की, 4 साल में पूरा।
राकेश कुमार तिवारी, बड़हरा (आरा)। गंगा की धारा से वर्षों से बिछड़े बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है।
आरा और बलिया के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को नई मजबूती देने वाली बहुप्रतीक्षित महुली गंगा पुल परियोजना अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 1,564 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 27.062 किलोमीटर लंबी आरा-बैरिया फोरलेन सड़क परियोजना के लिए तीन जुलाई को निविदा जारी कर दी है।
निविदा 20 अगस्त को खोले जाने की संभावना है। परियोजना का निर्माण ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर किया जाएगा।
यह फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जीन बाबा स्थान (बैरिया) से शुरू होकर खवासपुर और महुली गंगा घाट होते हुए आरा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जुड़ेगी।
योजना का सबसे अहम हिस्सा महुली गंगा घाट पर गंगा नदी पर बनने वाला स्थायी चार लेन पुल होगा, जिससे दशकों पुरानी आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।

(आरा-बलिया फोरलेन निर्माण के जारी संभावित नक्शा।)
30 किलोमीटर में सिमट जाएगी दूरी
वर्तमान में बैरिया से आरा की सीधी दूरी लगभग 30 किलोमीटर है, लेकिन गंगा नदी के कारण लोगों को छपरा होकर करीब 115 किलोमीटर या बक्सर के रास्ते लगभग 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है।
स्थायी पुल बनने के बाद आरा और बैरिया के बीच की दूरी फिर से लगभग 30 किलोमीटर रह जाएगी। वहीं पटना की दूरी भी घटकर करीब 90 किलोमीटर हो जाएगी। इससे यात्रा का समय और खर्च कम होगा तथा व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
छह महीने ही मिलता है पीपा पुल का सहारा
फिलहाल महुली गंगा घाट पर हर वर्ष केवल छह महीने के लिए पीपा पुल बनाया जाता है। बरसात शुरू होते ही इसे हटा दिया जाता है।
इसके बाद हजारों लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है। कई ग्रामीण आज भी जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीण गांधी राय का कहना है कि स्थायी पुल बनने से इस परेशानी से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी।
रिश्तों और विकास को मिलेगी नई रफ्तार
यह परियोजना केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आरा और बलिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रिश्तों को भी नई गति देगी।
दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच वर्षों से रोटी-बेटी का संबंध, व्यापारिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था और सामाजिक मेल-मिलाप बना हुआ है। स्थायी पुल बनने के बाद यह जुड़ाव और मजबूत होगा।
ग्रामीण जितेंद्र सिंह का कहना है कि इस परियोजना से सीमावर्ती इलाकों के विकास को नई दिशा मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी उठाई थी मांग
महुली गंगा घाट पर स्थायी पुल की मांग वर्षों पुरानी है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वर्ष 2006 में जयप्रकाश नगर की एक सभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष इस पुल के निर्माण की मांग उठाई थी।
अब एनएचएआई की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के साथ उनकी यह लंबे समय से चली आ रही इच्छा साकार होती नजर आ रही है।
परियोजना के तहत चयनित एजेंसी को चार वर्षों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इसके बाद पांच वर्षों तक सड़क और पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी एजेंसी के पास रहेगी।
21 मौजों की भूमि का होगा अधिग्रहण
आरा-बैरिया फोरलेन परियोजना के लिए आरा सदर और बड़हरा अंचल के कुल 21 मौजों की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। बड़हरा अंचल के नूरपुर नौवरार, नूरपुर, कुदरिया, जोकहरी, पकड़ी, गलचौर समेत अन्य मौजे इसमें शामिल हैं।
खबरें और भी
वहीं आरा सदर अंचल के सारसिवान, बसंतपुर, बेला, महुली, मथुरापुर, बहिरा चक, भेल डुमरा, पिरौटा, मखदुमपुर, यादवपुर, गरेआ, शोभी डुमरा, हादीव अलीपुर और सिंगही मौजों की भूमि का भी अधिग्रहण किया जाएगा। इससे फोरलेन सड़क और महुली गंगा पुल के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।