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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    KK Pathak: केके पाठक के नए ऑर्डर से मचा हड़कंप, इस जिले में रद होगी 349 एकड़ भूमि की जमाबंदी

    Updated: Fri, 11 Apr 2025 01:47 PM (IST)

    बिहार राजस्व परिषद के अध्यक्ष केके पाठक ने भोजपुर जिले के बड़हरा अंचल में गंगा किनारे स्थित 349 एकड़ जमीन की लगभग 50 वर्ष पहले हुई अवैध जमाबंदी के माम ...और पढ़ें

    बड़हरा अवैध जमाबंदी मामले में जल्द करें कार्रवाई: केके पाठक (फाइल फोटो)
    बड़हरा अवैध जमाबंदी मामले में जल्द करें कार्रवाई: केके पाठक (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. बड़हरा अवैध जमाबंदी मामले में जल्द करें कार्रवाई: केके पाठक
    2. 349 एकड़ गंगा की जमीन की अवैध जमाबंदी का जागरण ने किया था राजफाश
    3. एडीएम को न्यायालय में शीघ्र सुनवाई कर अतिक्रमण हटाने का आदेश

    जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले के बड़हरा अंचल क्षेत्र में गंगा के किनारे स्थित 349 एकड़ जमीन की लगभग 50 वर्ष पहले अवैध तरीके से जमाबंदी का मामला तूल पकड़ चुका है।

    बिहार राजस्व पर्षद के अध्यक्ष केके पाठक (KK Pathak) ने बुधवार को कलेक्ट्रेट में नीलामवाद की समीक्षा के दौरान इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया और डीएम को तुरंत पूरे मामले की जांच पड़ताल कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

    इसी वर्ष आठ मार्च को दैनिक जागरण ने इस खेल का राजफाश किया था और प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। उस समय से ही प्रशासन मामले की जांच में जुटा है।

    बैठक के दौरान एडीएम को केके पाठक ने कहा कि जल्द से जल्द अपने कोर्ट में मामले की सुनवाई कर अवैध जमाबंदी को रद करें और उस पर से अवैध लोगों का कब्जा और अतिक्रमण हटाएं।

    केके पाठक के आदेश से मचा हड़कंप

    किसने और किस तरह से इस तरह का अवैध कार्य किया है, इसकी भी जांच करें और सभी पर कार्रवाई की जाए। उनके इस आदेश के बाद जिला मुख्यालय के राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

    डीएम ने क्या बताया?

    इस मामले में डीएम ने बताया कि एडीएम के न्यायालय में अविलंब सुनवाई कर मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरा फर्जीवाड़ा बड़हरा प्रखंड क्षेत्र के सिन्हा मौजा में लगभग 349 एकड़ गंगा नदी, काली मंदिर और अन्य प्रकार की सरकारी जमीन की जमाबंदी अवैध तरीके से 228 लोगों के नाम पर किए जाने से जुड़ा हुआ है।

    यह जमीन घोटाला आजकल या कुछ वर्ष पहले का नहीं, बल्कि 50 वर्ष पहले 1975-76 से जुड़ा हुआ है। उस समय स्थानीय पदाधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है।

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