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    Ara MLC By-Election: टाइपराइटर से राष्ट्रपति चुनाव तक का सफर, कौन हैं 'चुनावबाज' लालू प्रसाद यादव?

    Updated: Fri, 24 Apr 2026 05:16 PM (IST)

    Ara MLC By-Election: आरा एमएलसी उपचुनाव में मढ़ौरा के एक टाइपिस्ट लालू प्रसाद यादव अपने अनोखे चुनावी जुनून के कारण चर्चा में हैं। वे वार्ड पार्षद से ल ...और पढ़ें

    टाइपिस्ट लालू प्रसाद यादव

    टाइपिस्ट लालू प्रसाद यादव 

    HighLights

    1. मढ़ौरा के टाइपिस्ट लालू प्रसाद यादव 'चुनावबाज लालू' के नाम से प्रसिद्ध।

    2. वार्ड पार्षद से राष्ट्रपति चुनाव तक लड़ने का जुनून रखते हैं।

    3. आरा MLC उपचुनाव में फिर मैदान में, सदन पहुंचने का लक्ष्य।

    आनंद प्रकाश, चरपोखरी (भोजपुर)। आरा MLC उपचुनाव में इस बार एक अलग ही नाम चर्चा में है। यह नाम किसी बड़े दल या गठबंधन के कारण नहीं, बल्कि एक शख्स के जुनून की वजह से सुर्खियों में है, Lalu Prasad Yadav।

    सियासी नहीं, जुनून की कहानी

    बिहार की राजनीति में जहां Lalu Prasad Yadav जैसे दिग्गजों का नाम गूंजता रहा है, वहीं इस उपचुनाव में एक आम व्यक्ति अपने अनोखे जुनून से चर्चा बटोर रहा है।

    मढ़ौरा का टाइपिस्ट, चुनाव लड़ना ही जुनून

    सारण जिले के मढ़ौरा कोर्ट में 1996 से टाइपराइटर पर काम करने वाले इस लालू प्रसाद यादव का चुनाव से गहरा लगाव है। जैसे ही चुनाव का ऐलान होता है, वे टाइपराइटर छोड़ नामांकन भरने निकल पड़ते हैं।

    ‘चुनावबाज लालू’ के नाम से पहचान

    लगातार चुनाव लड़ने की वजह से मढ़ौरा से लेकर आरा तक लोग उन्हें “चुनावबाज लालू” कहने लगे हैं। यह नाम अब उनकी पहचान बन चुका है।

    वार्ड पार्षद से शुरू हुआ सफर

    उनका चुनावी सफर 2001 में वार्ड पार्षद चुनाव से शुरू हुआ। इसके बाद 2006 और 2011 में भी उन्होंने इसी पद के लिए चुनाव लड़ा।

    विधायक और लोकसभा चुनाव में भी आजमाई किस्मत

    2015 और 2020 में उन्होंने विधायक चुनाव में भी किस्मत आजमाई। वहीं 2014 लोकसभा चुनाव में Rabri Devi के खिलाफ मैदान में उतरकर सबको चौंका दिया।

    राष्ट्रपति चुनाव तक पहुंचा हौसला

    उनका जुनून यहीं नहीं रुका। 2017 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए भी नामांकन दाखिल कर दिया, जिससे वे सुर्खियों में आ गए।

    लगातार जारी है चुनावी सफर

    2022 मोकामा और 2024 रूपौली उपचुनाव के बाद अब 2025 तरारी और आरा MLC उपचुनाव में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

    आरा से पुराना नाता, फिर मैदान में

    आरा की धरती से उनका पुराना रिश्ता है। 2022 के MLC चुनाव में भी वे यहां निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतर चुके हैं।

    नाम का असर और लोकतंत्र में भरोसा

    ग्रामीण इलाकों में ‘लालू’ नाम का अपना मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। बिना किसी संसाधन के भी वे पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरते हैं।

    ‘सदन तक पहुंचना ही सपना’

    जब उनसे पूछा जाता है कि यह सिलसिला कब तक चलेगा, तो उनका सीधा जवाब होता हैजब तक किसी सदन की दहलीज पार नहीं कर लेते।