बिहार की लोककला को मिली राष्ट्रीय पहचान, भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग, बावनबूटी और पत्थरकट्टी कला को मिला GI टैग
राष्ट्रीय हैंडलूम डे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग को जीआई टैग प्रमाणपत्र प्रदान किया, जिससे बिहार की समृद्ध लोककला को नई पहच ...और पढ़ें

हस्तशिल्प को मिली नई पहचान। (जागरण)
HighLights
भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग को मिला जीआई टैग प्रमाणपत्र।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सर्जना न्यास को सौंपा प्रमाणपत्र।
कलाकारों को मिलेंगे नए बाजार और रोजगार के अवसर।
जागरण संवाददाता, आरा। नेशनल हैंडलूम डे-2026 के अवसर पर बिहार की समृद्ध लोककला एवं हस्तशिल्प को नई पहचान मिली।
राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्राप्त भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग का प्रमाणपत्र भोजपुर की संस्था सर्जना न्यास को प्रदान किया।
इसके साथ ही नालंदा की बावनबूटी और गया की पत्थरकट्टी पाषाण कला से जुड़ी संस्थाओं को भी जीआई प्रमाणपत्र सौंपे गए।
भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग भोजपुर अंचल की पारंपरिक लोकचित्रकला है, जिसका संबंध भाई-बहन के स्नेह और मंगलकामना से जुड़े पीड़िया पर्व से है।
दीपावली और गोवर्धन पूजा के बाद कुंवारी कन्याएं गोबर, धान, चावल तथा प्राकृतिक रंगों से घरों की दीवारों पर पारंपरिक चित्रांकन करती हैं।
भोजपुर की पहचान है यह परंपरा
यही परंपरा आज भोजपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। इस अवसर पर नाबार्ड की ओर से पटना के मौर्यलोक परिसर में तीन दिवसीय हैंडलूम प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया।
प्रदर्शनी में जीआई टैग प्राप्त तीनों कलाओं के साथ भोजपुरिया क्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड समेत 11 संस्थाओं ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई प्रमाणपत्र से इन लोककलाओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और स्थानीय कलाकारों व शिल्पकारों के लिए नए बाजार एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।