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    ‘बोर्ड ऑफिस से बोल रहा हूं… आपकी बहन दो विषयों में फेल है’ : रिजल्ट से पहले सक्रिय ठग, अभिभावकों को किया जा रहा कॉल

    Updated: Thu, 12 Mar 2026 11:37 AM (IST)

    Bihar Board Exam Fraud: बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम से पहले ठगों का एक संगठित गिरोह सक्रिय हो गया है। ये खुद को बोर्ड अधिकारी बताकर अभिभावकों को फ ...और पढ़ें

    रिजल्ट से पहले सक्रिय ठग

    रिजल्ट से पहले सक्रिय ठग

    संवाद सूत्र, चरपोखरी (भोजपुर)। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम आने से पहले ठगी का एक संगठित गिरोह सक्रिय हो गया है। यह गिरोह परीक्षार्थियों के अभिभावकों को फोन कर उनके बच्चों के फेल होने का डर दिखाकर पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहा है। ठग खुद को पटना बोर्ड ऑफिस का कर्मचारी बताकर परिजनों को कॉल करते हैं। वे दावा करते हैं कि छात्र-छात्रा एक या दो विषयों में फेल हो रहे हैं। इसके बाद पैसे देने पर फर्स्ट डिवीजन से पास कराने का झांसा दिया जाता है।

    सटीक जानकारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश

    हाल ही में चरपोखरी के आनंद प्रकाश को ऐसा ही एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनकी बहन के फेल होने की बात कहते हुए पैसे देने पर फर्स्ट डिवीजन से पास कराने का प्रस्ताव दिया।

    इसी तरह लाखा उच्च विद्यालय बरनी के प्रभारी प्राचार्य बाल गंगाधर तिलक को भी ठगों ने निशाना बनाया। ठगों ने उनके भतीजे का नाम और अन्य जानकारी बताते हुए फोन किया और कहा कि छात्र गणित में फेल हो रहा है। पास कराने के नाम पर पैसे की मांग की गई।

    ऑडियो में सामने आया ठगी का तरीका

    आनंद प्रकाश के पास मौजूद ऑडियो क्लिप में ठग खुद को बोर्ड कार्यालय का कर्मचारी बताता है। वह छात्रा का नाम, माता-पिता का नाम और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बेहद आत्मविश्वास के साथ बताता है।

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    इसके बाद वह कहता है कि छात्रा केमिस्ट्री और फिजिक्स में फेल हो रही है। यदि परिजन चाहते हैं कि वह फर्स्ट डिवीजन से पास हो जाए तो ऑनलाइन भुगतान करना होगा। इस तरह की बातचीत से आम लोग आसानी से झांसे में आ सकते हैं।

    डेटा लीक को लेकर उठ रहे सवाल

    इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल छात्रों के डेटा की गोपनीयता को लेकर उठ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि ठगों के पास छात्रों के मोबाइल नंबर और पारिवारिक जानकारी कैसे पहुंच रही है।

    शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ सूत्रों के अनुसार परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को जिला मुख्यालयों के स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। इसके बाद बारकोडिंग और कंप्यूटर पर डेटा फीडिंग की प्रक्रिया होती है। आशंका जताई जा रही है कि इसी स्तर पर डेटा लीक हो सकता है।

    निजी एजेंसियों पर भी उठी आशंका

    बारकोडिंग और डेटा एंट्री का काम कई बार निजी एजेंसियों या बाहरी कर्मियों को दिया जाता है। ऐसे में आशंका है कि इसी प्रक्रिया के दौरान छात्रों का निजी डेटा बाहर पहुंच रहा है।

    ठग इसी जानकारी का इस्तेमाल कर अभिभावकों को फोन करते हैं। वे जल्दी कॉपियां जमा होने और रिजल्ट जारी होने का दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। इससे कई लोग घबराकर ठगी का शिकार हो सकते हैं।

    अभिभावक रहें सतर्क, बोर्ड नहीं करता ऐसे कॉल

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति कभी भी किसी छात्र या अभिभावक को इस तरह व्यक्तिगत फोन नहीं करती।

    यदि किसी को ऐसा कॉल आए तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी अज्ञात नंबर पर पैसे न भेजें और इसकी सूचना पुलिस या साइबर सेल को दें। अभिभावकों और छात्रों को ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है।

    डीईओ ने डेटा लीक मामले से झाड़ा पल्ला

    इस पूरे मामले पर भोजपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेन्द्र कुमार राय ने कहा कि छात्रों का डेटा जालसाजों तक कैसे पहुंच रहा है, इस बारे में वे कुछ नहीं कह सकते।

    उन्होंने इसे साइबर अपराध से जुड़ा मामला बताया। डीईओ ने अभिभावकों से अपील की कि वे ऐसे फोन कॉल से सावधान रहें और किसी भी तरह के प्रलोभन में न आएं।