15 बीघा जमीन लीज पर लेकर युवा किसान ने बदली तकदीर, सालाना 30 लाख की कमाई
बिरमपुर गांव के युवा किसान धर्मेंद्र ने बिना अपनी जमीन के लीज पर 15 बीघा भूमि लेकर सालाना 30 लाख रुपये की खेती की। उन्होंने मौसम आधारित और ऑफ-सीजन खेत ...और पढ़ें

15 बीघा जमीन लीज पर लेकर युवा किसान ने बदली तकदीर, सालाना 30 लाख की कमाई

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नीरज कुमार, कोईलवर (आरा)। खेती को घाटे का सौदा मानने वालों के लिए बिरमपुर गांव के युवा किसान धर्मेन्द्र उर्फ मुन्ना ने एक नई राह दिखाई है। कभी मजदूरी कर रोज मुश्किल से एक सौ रुपये कमाने वाले मुन्ना आज बिना अपनी जमीन के ही सालाना करीब 30 लाख रुपये की खेती कर रहे हैं।
उनकी सफलता की कहानी अब जिले में चर्चा का विषय बन गई है। धर्मेन्द्र के पास अपनी खेती योग्य जमीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय गांव के किसानों से 15 बीघा जमीन लीज पर लेकर सब्जी की खेती शुरू की।
परंपरागत खेती से हटकर मौसम आधारित खेती को उन्होंने अपनी मेहनत का आधार बनाया और तकनीक का इस्तेमाल कर सफलता किसान बने।
धर्मेंद्र बताते हैं कि शुरुआत में मौसम, लागत और बाजार की अनिश्चितता जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने धैर्य और नई तकनीकों के सहारे अपनी राह बनाई। उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी फसल विविधता और आफ सीजन खेती है।
वे सालभर करीब 15 प्रकार की सब्जियां और फल उगाते हैं, जिनमें टमाटर, भिंडी, लौकी, परवल, गोभी, आलू के साथ कटहल और बेर जैसे फल भी शामिल हैं। वे एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि मौसम के अनुसार फसल बदलते रहते हैं, जिससे उन्हें बाजार में लगातार अच्छा दाम मिलता है।
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ऑफ सीजन खेती उनकी कमाई का मुख्य आधार है। जब बाजार में किसी सब्जी की कमी होती है, उसी समय उनकी फसल तैयार रहती है, जिससे उन्हें सामान्य से दो तीन गुना अधिक कीमत मिल जाती है।
तकनीक का उपयोग भी उनकी सफलता का अहम हिस्सा है। धर्मेन्द्र कहते हैं कि मौसम आधारित खेती की सबसे अच्छी बात है कि बाजार आसानी से उपलब्ध रहता है।
सोशल मीडिया से सीखी सिंचाई की आधुनिक तकनीक
यूट्यूब को सीखने का माध्यम बनाया और वहीं से ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, उन्नत बीज चयन और कीट प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ।
अब के समय में धर्मेन्द्र न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि गांव के करीब 10 लोगों को स्थायी रोजगार भी दे रहे हैं।
ये लोग खेती में सहयोग से लेकर फसल को बाजार तक पहुंचाने और भंडारण का कार्य करते हैं। वे 15 बीघा जमीन के लिए प्रत्येक साल प्रति बीघा 18 हजार रुपये किराया देते हैं और इसके बावजूद अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।