Bhojpur News: आधार और जमाबंदी में नाम के अंतर से 80% किसानों का नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन
केंद्र सरकार की किसान कार्ड पंजीकरण प्रक्रिया बिहार के किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। आधार और जमाबंदी में नाम की स्पेलिंग या उपनाम में अंतर के कारण ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, चरपोखरी (आरा)। केंद्र सरकार द्वारा किसानों की सुविधा के लिए शुरू की गई किसान कार्ड पंजीकरण प्रक्रिया वर्तमान में किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। पंचायत स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर, अंचल कार्यालय और कृषि विभाग द्वारा कैंप लगाकर पंजीकरण तो किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी नियमों की पेचीदगियों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
जहां पंजीकरण के दौरान आधार और जमाबंदी के नाम का मेल न होना सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है, जबकि पंजीकरण के लिए सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि किसान के आधार कार्ड पर लिखा नाम और जमाबंदी पंजी (जमीन के दस्तावेज) में दर्ज नाम हूबहू एक समान होना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति यह है कि लगभग 80 से 90 प्रतिशत किसानों के दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग या उपनाम में अंतर है। उदाहरण के तौर पर यदि जमाबंदी में नाम रामवृक्ष महतो है और आधार में केवल रामवृक्ष या स्पेलिंग में मामूली अंतर है, तो पोर्टल उसे स्वीकार नहीं कर रहा है। इस तकनीकी बाधा के कारण कैंपों से किसान मायूस होकर लौट रहे हैं।
अंचल और सीएससी के चक्कर काट रहे किसान
पंजीकरण न हो पाने के कारण किसान अब जमाबंदी सुधार के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। किसान बराढ़ निवासी राजू कुमार, चरपोखरी कृष्णा कुमार, पसौर निवासी राजकुमार का कहना है कि पूर्व में जमाबंदी पंजी हाथ से लिखी जाती थी। जिसमें स्थानीय भाषा या उच्चारण के अनुसार नाम दर्ज कर दिए गए थे। अब डिजिटल युग में आधार के साथ उसका मिलान अनिवार्य होने से एक बड़ा वर्ग इस सरकारी योजना के लाभ से वंचित होने की कगार पर है। इसी कारण किसान पंजीकरण नही हो पा रहा है।
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पंजीकरण के लिए अनिवार्य दस्तावेज
- आधार कार्ड
- जमीन संबंधित दस्तावेज, लगान रसीद या जमाबंदी की छायाप्रति
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर
क्या कहते हैं अधिकारी?
जमाबंदी में नाम की स्पेलिंग में किसी भी प्रकार की त्रुटि है वे परिमार्जन पोर्टल से सुधार के लिए आवेदन कर उसकी कॉपी तुरंत अंचल कार्यालय में जमा करें। कार्यलय में इसके लिए एक विशेष रजिस्टर बनाया गया है। हम इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देख रहे हैं। त्रुटियों का त्वरित निष्पादन किया जा रहा है, ताकि किसानों का पंजीकरण बिना बाधा के हो सके। -चंदन चौधरी, सीओ, चरपोखरी