सरकारी नौकरी नहीं मिली तो शुरू किया बिजनेस; आज 5 राज्यों में बिक रहा आरा का ‘रिद्धि-सिद्धि’ नमकीन
सरकारी नौकरी न मिलने पर आरा के नारायण सिंह ने गांव में सत्तू-बेसन का व्यवसाय शुरू किया, जिसे बाद में नमकीन फैक्ट्री में बदला। आज उनकी 'रिद्धि-सिद्धि' ...और पढ़ें

नमकीन फैक्ट्री में काम करते कारीगर। जागरण
HighLights
सरकारी नौकरी न मिलने पर गांव में शुरू किया व्यवसाय।
'रिद्धि-सिद्धि' नमकीन फैक्ट्री 30 लोगों को दे रही रोजगार।
उत्पाद बिहार सहित पांच राज्यों में हो रहे हैं सप्लाई।
जागरण संवाददाता, बड़हरा (आरा)। दियारा क्षेत्र स्थित चातर गांव के नारायण सिंह ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर गांव में रहकर भी स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
इतना ही नहीं, दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों तक संघर्ष करने और राजकोट व मुंबई जैसे महानगरों में निजी कंपनियों में नौकरी की।
सफलता नहीं मिलने पर लौटे गांव
बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने हार मानने के बजाय गांव लौटकर अपना व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया।
वर्ष 2011 में नारायण सिंह ने अपने घर से बेहद मामूली पूंजी के साथ सत्तू और बेसन बनाने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

(व्यवसायी नारायण सिंह।)
लेकिन धैर्य और मेहनत के बल पर उन्होंने अपने कारोबार को लगातार आगे बढ़ाया। करीब एक दशक तक इस व्यवसाय को मजबूत करने के बाद वर्ष 2024 में कर्मचारियों के सुझाव पर उन्होंने नमकीन निर्माण की फैक्ट्री स्थापित की।
सरकार द्वारा जीएसटी दरों में कमी किए जाने से उन्हें कारोबार विस्तार में काफी मदद मिली। आज उनकी ‘रिद्धि-सिद्धि’ नमकीन फैक्ट्री दियारा क्षेत्र में स्वरोजगार की मिसाल बन चुकी है।
फैक्ट्री में वर्तमान में 10 पुरुष और 20 महिला कर्मी कार्यरत हैं। इससे गांव की महिलाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
फैक्ट्री में 30 को दे रहे रोजगार
फैक्ट्री में नमकीन सेव, दालमोठ, बादाम मिक्सचर, गठिया, मटर मसाला और निमकी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों में थोक स्तर पर नमकीन की आपूर्ति की जा रही है।
नारायण सिंह ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को यह संदेश देना भी है कि रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन ही एकमात्र विकल्प नहीं है।
सही योजना और मेहनत के साथ स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है।
सीमित संसाधनों के बीच दियारा क्षेत्र में नारायण सिंह की यह सफलता आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनका प्रयास इस बात का उदाहरण है कि स्वरोजगार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।