भोजपुर में अब मिथिला के 'उजला सोना' की खेती, जलजमाव वाली जमीन पर मखाना उगाएंगे किसान
भोजपुर जिले में अब जलजमाव वाली अनुपयोगी भूमि पर मखाना (फॉक्स नट) की खेती शुरू की जा रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। ...और पढ़ें

भोजपुर में मखाना की खेती
HighLights
भोजपुर में जलजमाव वाली भूमि पर मखाना की खेती का आगाज।
कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को मखाना उत्पादन की तकनीक सिखाएगा।
एक एकड़ में सफल प्रयोग, भोजपुर बनेगा नया मखाना उत्पादक क्षेत्र।
जागरण संवाददाता, आरा। मिथिला के उजला सोना कहे जाने वाले मखाना (फॉक्स नट) की खेती अब भोजपुर जिले में भी किसानों की आय का नया जरिया बनेगा। जिले में बड़ी संख्या में ऐसी जमीनें हैं, जहां जलजमाव के कारण खरीफ और रबी फसलों की खेती नहीं हो पाती है। अब उन्हीं उपेक्षित जलमग्न क्षेत्रों में किसान मखाना की खेती कर सकेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र (कृविके) ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। केंद्र की ओर से किसानों को मखाना उत्पादन की तकनीक से प्रशिक्षित किया जाएगा।
हजारों एकड़ भूमि जलजमाव के कारण बेकार
जिले के तरारी, संदेश, जगदीशपुर, बड़हरा और कोईलवर प्रखंडों के कई गांवों में हजारों एकड़ भूमि जलजमाव के कारण वर्षों से बेकार पड़ी है। किसान फसल बर्बाद होने की आशंका से इन जमीनों पर खेती नहीं करते हैं।
मखाना की खेती के लिए ऐसी ही जलमग्न भूमि उपयुक्त मानी जाती है। इसी संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र ने भोजपुर में पहली बार मखाना उत्पादन का प्रयोग शुरू किया है।
पहली बार एक एकड़ खेती
शहर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में पहली बार एक एकड़ क्षेत्रफल में मखाना की खेती की गई है। इसके लिए पूर्णिया कृषि विश्वविद्यालय से मखाना के करीब सात सौ बीज मंगाए गए थे। वहां बीजड़ा तैयार करने के बाद मार्च महीने में कृविके परिसर की उस भूमि में रोपाई की गई, जो जलजमाव के कारण वर्षों से अनुपयोगी पड़ी थी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार मौर्या ने बताया कि जिले में पहली बार मखाना के बीज का रोपण किया गया है। एक एकड़ भूमि में इसकी खेती की गई है। इसकी फसल अगस्त-सितंबर महीने तक तैयार होने की उम्मीद है।
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उन्होंने बताया कि अब तक भोजपुर जिले में मखाना की व्यावसायिक खेती नहीं हुई थी।उन्होंने कहा कि सफल उत्पादन के बाद जिले के किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को बीज तैयार करने, खेत में रोपण करने, फसल की देखभाल, मखाना निकालने और उसे बाजार तक पहुंचाने की पूरी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
छह हेक्टेयर में होगी परिसर के उपेक्षित जमीन में खेती
कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज बनने के बाद जल निकासी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके कारण परिसर की करीब छह हेक्टेयर भूमि पिछले पांच वर्षों से जलजमाव की वजह से खेती के लिए अनुपयोगी बनी हुई है।
डॉ. अजय कुमार मौर्या ने बताया कि पानी निकासी के लिए जिला प्रशासन से आग्रह किया गया था, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में इस भूमि पर भी मखाना की खेती करने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि यदि कृविके में मखाना की खेती सफल होती है तो इससे किसानों को नई प्रेरणा मिलेगी। जलजमाव वाली बेकार पड़ी जमीन से किसान बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकेंगे। इससे भोजपुर भी आने वाले समय में मखाना उत्पादक जिलों की सूची में शामिल हो सकता है।