भोजपुर के जगदीशपुर में बनेगा 100 बेड का हाफ वे होम, मानसिक रूप से ठीक मरीजों को मिलेगा आशियाना
भोजपुर के जगदीशपुर में जल्द ही 100 बेड का हाफ वे होम स्थापित होगा, जिससे मानसिक बीमारी से स्वस्थ हुए मरीजों को जिले में ही पुनर्वास मिल सकेगा। यह पहल ...और पढ़ें

जगदीशपुर में बनेगा 100 बेड का हाफ वे होम
HighLights
जगदीशपुर में 100 बेड का हाफ वे होम बनेगा।
मानसिक रूप से स्वस्थ मरीजों को जिले में पुनर्वास मिलेगा।
चीफ जस्टिस के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग को प्रस्ताव।
नीरज कुमार, कोईलवर (आरा)। भोजपुर जिले के जगदीशपुर में जल्द ही 100 बेड का हाफ वे होम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को प्रस्ताव भेज दिया गया है। हाफ वे होम बनने से मानसिक बीमारी से स्वस्थ हो चुके अज्ञात मरीजों को अपने जिले में ही पुनर्वास की सुविधा मिल सकेगी।
बिमहास, कोईलवर के निदेशक डॉ. जयेश रंजन ने बताया कि हाल ही में बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य सह सहबद्ध विज्ञान संस्थान (बिमहास) कोईलवर के निरीक्षण पर पहुंचे चीफ जस्टिस ने जिले में हाफ वे होम खोलने का निर्देश दिया था।
इसके बाद समाज कल्याण विभाग को 100 बेड वाले हाफ वे होम का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें 50 बेड पुरुषों और 50 बेड महिलाओं के लिए होंगे। इसके निर्माण के लिए जगदीशपुर में उपयुक्त जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है।
मरीजों को बाहर भेजने की आवश्यकता नहीं
निदेशक ने बताया कि छह महीने में बिमहास से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके अज्ञात मरीजों को पुनर्वास के लिए भागलपुर और पटना स्थित हाफ वे होम भेजना पड़ता है। एक सौ मरीजों के ठीक होने पर उन्हें भेजा गया है। जिनमें 25 अज्ञात और अन्य जिन्हें घर वाले नहीं ले जा रहे थे, ऐसे ठीक हुए लोगों को लीगल और पुलिस टीम द्वारा उनके घर भेजा गया है।
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निदेशक ने कहा कि जिले में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को बाहर भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
ये सुविधाएं मिलेगी
हाफ वे होम एक अस्थायी आवासीय पुनर्वास केंद्र होता है, जहां मानसिक बीमारी से स्वस्थ हो चुके लोगों, नशा मुक्ति केंद्र से बाहर आए व्यक्तियों तथा जेल से रिहा हुए कैदियों को सामान्य जीवन में दोबारा लौटने के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
यहां रहने, भोजन, दवा, परामर्श और पुनर्वास से जुड़ी अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए तैयार करना है।