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    पटना-सासाराम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की एलाइनमेंट मैपिंग, भड़के भूस्वामी; बोले- आवासीय जमीन को भिट बता दे रहे कम राशि

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 09:51 PM (IST)

    कोईलवर में पटना-सासाराम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की मैपिंग के दौरान भूस्वामियों ने मुआवजे की दर पर विरोध जताया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आवासीय जमी ...और पढ़ें

    पोकलेन से खेत रौंदने का आरोप

    पोकलेन से खेत रौंदने का आरोप

    HighLights

    1. कोईलवर में एक्सप्रेस-वे मैपिंग के दौरान भूस्वामियों का विरोध।

    2. आवासीय जमीन को 'भिट भूमि' बताकर कम मुआवजा देने का आरोप।

    3. प्रशासन से उचित मुआवजे और पारदर्शिता की मांग की गई।

    संवाद सूत्र, कोईलवर (भोजपुर)। पटना-सासाराम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर बुधवार को कोईलवर अंचलाधिकारी उदय प्रताप सिंह कोसीहान गांव पहुंचे। यहां एलाइनमेंट मैपिंग के दौरान भूस्वामियों ने मुआवजा दर को लेकर विरोध जताया।

    ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आवासीय जमीन को सरकारी अभिलेखों में भिट भूमि बताकर कम मुआवजा दिया जा रहा है।

    विरोध के बीच अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष राकेश रोशन ने भूस्वामियों को समझाया, जिसके बाद सर्वेयर टीम ने करीब 300 मीटर अधिग्रहित भूमि की एलाइनमेंट मैपिंग पूरी की।

    3750 करोड़ की लागत से बनेगा 120 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे

    मैपिंग के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। गल्फार कंपनी के सर्वे मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि करीब 3750 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना के तहत 120 किलोमीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाया जाना है।

    परियोजना का मार्ग कोईलवर प्रखंड के खनगांव, कोसीहान, मानपुर, गुड़ी और जलपुरा गांवों से होकर गुजर रहा है। इसके लिए किसानों की 100 बीघा से अधिक कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

    भूस्वामियों का आरोप- आवासीय जमीन को बताया जा रहा भिट

    विरोध कर रहे राजनंदन चौधरी, उमेश, रवीश रंजन, अरविंद कुमार और विनोद चौधरी ने आरोप लगाया कि कोसीहान मौजा में कई लोगों की आवासीय जमीन को सरकारी अभिलेखों में भिट भूमि बताकर मुआवजा दिया जा रहा है।

    उनका कहना है कि इन जमीनों पर वर्षों से मकान बने हुए हैं और अधिग्रहण के बाद कई परिवार भूमिहीन हो जाएंगे।

    कोसीहान निवासी पिंटू कुमार ने कहा कि मौजा में दर्जनों लोगों की आवासीय भूमि को भिट दिखाकर मुआवजा देने की प्रक्रिया की जा रही है।

    ग्रामीणों ने प्रशासन से जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    पोकलेन से खेत रौंदने का भी आरोप

    उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पोकलेन मशीन लगाकर हरी सब्जियों के खेत को रौंद दिया गया। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से पहले किसानों को कोई सूचना नहीं दी गई।

    भूस्वामियों ने प्रशासन से अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की है।

    वहीं, प्रशासन की समझाइश के बाद मैपिंग का काम पूरा कराया गया। परियोजना के तहत आगे की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में अब भी मुआवजे और जमीन के वर्गीकरण को लेकर असंतोष बना हुआ है।

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