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    Makar Sankranti 2026: 14 जनवरी की रात 9.19 बजे उत्तरायण होगा सूर्य, 15 को मनेगी मकर संक्रांति

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 09:33 PM (IST)

    Makar Sankranti Date : मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, जब सूर्य 14 जनवरी की रात 9:19 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होंगे। इसके साथ ...और पढ़ें

    मकर संक्रांति 2026। (जागरण)

    मकर संक्रांति 2026। (जागरण)

    HighLights

    1. मकर संक्रांति 15 जनवरी को, सूर्य 14 रात उत्तरायण होंगे।

    2. खरमास समाप्त, पवित्र नदियों में स्नान-दान का विशेष महत्व।

    3. शुक्र अस्त होने से शादियां 4 फरवरी से शुरू होंगी।

    संवाद सूत्र, उदवंतनगर (आरा)। प्रकृति, सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता मकर संक्रांति एक पावन पर्व है जिसका सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है।

    इस बार यह प्रकृति पर्व 15 जनवरी गुरुवार को मनाई जाएगी। हालांकि, 14 जनवरी की रात में ही सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायन हो जाएंगे और खरमास समाप्त माना जाएगा।

    15 से ही शादी-विवाह को छोड़ अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।

    पंडित दिनेश पांडेय, पंडित विवेकानंद पांडेय, पंडित ध्रुप पाठक ने बताया कि 14 जनवरी बुधवार की रात 9:19 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे और दूसरे दिन 15 जनवरी गुरुवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।

    मकर संक्रांति का शास्त्रोक्त नियम है कि प्रदोष काल के बाद रात्रि में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो पुण्य कल दूसरे दिन मनाया जाता है।

    पुण्यकाल गुरुवार को दिन में एक 1.19 बजे तक रहेगा। कुंभ लग्न में सुबह 8:31 से 10:02 बजे तक स्नान विशेष फलदाई होगा। इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान और दान का महत्व है। साथ ही दही, चुड़ा, काला तिल, कंबल आदि दान का महत्व माना गया है।

    मकर संक्रांति को बनेगी खिचड़ी

    पंडित विश्वनाथ तिवारी और पंडित विवेकानंद पांडेय ने बताया कि पर्व के दिन गुरुवासरीज वर्जना की महत्व नहीं रह जाता है। आम दिनों में गुरुवार को खिचड़ी बनाना और खाना वर्जित है, लेकिन पर्व विशेष पर यह भेद समाप्त हो जाता है।

    वैसे में 15 जनवरी गुरुवार को खिचड़ी पर्व मना सकते हैं। संयोगवश इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन तिल द्वादशी है। मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण पक्ष द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी।

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    मकर संक्रांति के 20 दिन बाद बजेगी शहनाई

    मकर संक्रांति के दिन खरमास समाप्त होने के बावजूद चार फरवरी से शादी की शहनाई बजेगी। वैसे में खरमास समाप्त होने का इंतजार कर रहे लोगों को और 20 दिन का इंतजार करना होगा।

    शुक्र के अस्त होने से विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर चार फरवरी तक रोक रहेगी। वैसे तो शुक्र एक फरवरी को उदय लेंगे। लेकिन तीन दिन बाल्यावस्था रहने के बाद लगन शुरू माना जाएगा।

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