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    गुड़ही जलेबी और बेरों की खुशबू से महका बहरी महादेव धाम; महाशिवरात्रि पर भक्‍तों से गुलजार रहा बैरिया मेला

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 03:32 PM (IST)

    महाशिवरात्रि पर पीरो के बहरी महादेव धाम में प्रसिद्ध बैरिया मेला लगा। गुड़ही जलेबी और पके बेरों की खुशबू के बीच मेले में भारी भीड़ उमड़ी। यह धार्मिकता ...और पढ़ें

    बेर की खरीदारी करते लोग। जागरण

    बेर की खरीदारी करते लोग। जागरण

    HighLights

    1. महाशिवरात्रि पर पीरो के बहरी महादेव धाम में बैरिया मेला।

    2. गुड़ही जलेबी, पके बेर और लोक-संस्कृति का अनूठा संगम।

    3. भारी भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित रहा मेला, प्रशासन सक्रिय।

    विनोद सुमन, पीरो (आरा)। एक ओर गरमा-गरम गुड़ही जलेबी की सोंधी खुशबू, तो दूसरी ओर ताजे और पके बेरों की मीठी गंध, इन सबके बीच प्रसिद्ध बैरिया मेले का अद्भुत आनंद। बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं और पुरुष, सभी मेले की ओर खिंचे चले आ रहे थे।

    हम बात कर रहे हैं पीरो नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत बहरी महादेव धाम में शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित प्रसिद्ध बैरिया मेले की। यह मेला धार्मिकता और मनोरंजन का अनूठा संगम है।

    रविवार होने के कारण दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि विशाल मेला परिसर भी भीड़ के सामने छोटा पड़ गया। चारों ओर रंग-बिरंगे परिधानों में सजे लोग ही लोग, तिल रखने तक की जगह नहीं बची।

    मेले में भोजपुर की लोक-संस्कृति का जीवंत नजारा देखने को मिला। आधुनिकता के दौर में भी परंपराओं से जुड़ाव साफ झलक रहा था।

    लोगों में अपनी गंवई पहचान बनाए रखने की खास जिजीविषा दिखी। मेले का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप आज भी वैसा ही नजर आया, जैसा दशकों पहले हुआ करता था।

    प्रकृति के सुरम्य वातावरण में, हरे-भरे घने पेड़ों से घिरे परिसर में तरह-तरह की दुकानों की रौनक थी। सौंदर्य प्रसाधनों की फुटपाथी दुकानों पर नई नवेली दुल्हनें सिंदूर, बिंदी, लिपस्टिक, काजल, गजरा और चोटी खरीदती नजर आईं। वहीं छोटे बच्चे गुब्बारे, घोड़ा गाड़ी, बंदूक, पिपिहरी, बिगुल और स्पाइडर मैन जैसे खिलौनों के लिए मचलते दिखे।

    मेले की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि बिना गुड़ही जलेबी और मीठे पके बेर खाए कोई लौटता नहीं दिखा। लोग न सिर्फ खुद खा रहे थे, बल्कि अपने स्वजनों और रिश्तेदारों के लिए भरपूर मात्रा में गठरी बांधकर भी ले जा रहे थे।

    छोले-चाट के ठेलों पर भी इतनी भीड़ थी कि प्लेट हाथ में आते ही मानो किला फतह करने जैसी खुशी दिखती थी। ऐसे में दुकानदारों की चांदी ही चांदी रही।

    इतने बड़े जनसमागम के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह अनुशासित रही। एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में वर्दीधारी जवान तैनात थे, हालांकि भीड़ को नियंत्रित करने में उन्हें ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य भी पूरी तरह सक्रिय दिखे।

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    मेले में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पीरो नगर परिषद की ओर से सभी आवश्यक इंतजाम किए गए थे। खुद नगर परिषद की सभापति किरण उपाध्याय और जदयू के प्रदेश महासचिव मनोज उपाध्याय मेले में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए थे।