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    VKSU के 13 JRF अभ्यर्थियों का असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन, PhD और फेलोशिप को लेकर नई शर्त

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 03:35 PM (GMT+05:30)

    वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 13 जेआरएफ शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन हुआ है। अब उन्हें पूर्णकालिक पीएचडी और जेआरएफ फेलोशिप छोड़नी होगी ...और पढ़ें

    नौकरी और शोध कार्य साथ-साथ नहीं।

    नौकरी और शोध कार्य साथ-साथ नहीं।

    जागरण संवाददाता, आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) के लिए पंजीकृत 89 अभ्यर्थियों में से 13 शोधार्थियों का चयन सहायक प्राध्यापक के पद पर हुआ है।

    नियुक्ति के बाद इन शोधार्थियों को फुलटाइम पीएचडी छोड़नी होगी। इसका सीधा असर उन्हें मिल रही यूजीसी की जेआरएफ शोधवृत्ति पर भी पड़ेगा।

    नियुक्ति के बाद उन्हें शोधवृत्ति की राशि छोड़नी होगी। हालांकि, अभी तक विश्वविद्यालय में पंजीकृत किसी भी जेआरएफ शोधार्थी ने सहायक प्राध्यापक पद पर चयन और योगदान के संबंध में विश्वविद्यालय को सूचना नहीं दी है।

    जेआरएफ के नोडल पदाधिकारी डाॅ. आनंद भूषण पांडेय ने बताया कि अभी तक किसी चयनित अभ्यर्थी ने इस संबंध में सूचना नहीं दी है।

    वहीं, अगस्त माह की शोधवृत्ति की अग्रिम स्वीकृति स्थगित कर दी गई है, क्योंकि 10 अगस्त को सभी चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित कालेजों में योगदान करना है।

    जेआरएफ के तहत अभ्यर्थियों को प्रत्येक माह 42,000 से 50,000 रुपये तक शोधवृत्ति मिलती है। सहायक प्राध्यापक के पद पर चयनित अभ्यर्थी को दोनों में से किसी एक का विकल्प चुनना होगा। एक साथ दोनों की राशि नहीं ली जा सकती।

    नियुक्ति के समय देना होगा शपथ पत्र

    कुलसचिव प्रो. रामकृष्ण ठाकुर ने बताया कि शिक्षा विभाग ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में स्पष्ट शर्त रखी है कि फुलटाइम पीएचडी कर रहे चयनित अभ्यर्थियों को शोध कार्य छोड़ना होगा।

    संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में योगदान देने वाले अभ्यर्थियों से इस संबंध में शपथ पत्र (अंडरटेकिंग) भी लिया जाएगा। इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि वे नियमित रूप से फुलटाइम शोध कार्य नहीं करेंगे।

    यदि कोई अभ्यर्थी पहले से फुलटाइम पीएचडी में नामांकित है तो उसे नियुक्ति के बाद शोध कार्य छोड़ना होगा।

    शिक्षण और फुलटाइम शोध साथ करना संभव नहीं

    विभाग का तर्क है कि संविदा सहायक प्राध्यापकों को कालेजों में पूर्णकालिक रूप से शिक्षण कार्य करना होगा। ऐसे में फुलटाइम शोध और नियमित शिक्षण सेवा एक साथ करना संभव नहीं है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति के समय चयनित अभ्यर्थियों से शपथ पत्र लेने का प्रावधान किया गया है। इसका असर जेआरएफ के तहत मिलने वाली शोधवृत्ति पर भी पड़ेगा।

    166 चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन

    वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत खुलने वाले 15 नए डिग्री कालेजों में 178 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होनी है।

    नियुक्ति प्रक्रिया के तहत आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों के शैक्षणिक मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। अब तक 166 अभ्यर्थियों ने अपने मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन करा लिया है, जबकि सात अभ्यर्थी सत्यापन के लिए अनुपस्थित रहे।

    अनुपस्थित रहने वालों में इतिहास विषय के दो, अंग्रेजी का एक, समाजशास्त्र के दो और अर्थशास्त्र के दो अभ्यर्थी शामिल हैं। संबंधित अभ्यर्थियों के सत्यापन को लेकर आयोग के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    छह विषयों की शुरू हुई है पढ़ाई

    नए डिग्री कालेजों में विद्यार्थियों के लिए छह प्रमुख विषयों की पढ़ाई शुरू हो गई है। शिक्षकों के अभाव में कक्षा संचालन प्रभावित हो रहा है।

    इनमें हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास और राजनीति शास्त्र शामिल हैं। इन विषयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति से नए कालेजों में शिक्षण व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

    15 नए डिग्री कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं उपलब्ध कराने की दिशा में विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।