यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 13, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इच्छाओं की पूर्ति व मोक्ष प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन अश्वमेध यज्ञ
बक्सर 51वें सिय-पिय मिलन महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को श्रीमद् बाल्मीकि रामायण की कथा का ...और पढ़ें

बक्सर : 51वें सिय-पिय मिलन महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को श्रीमद् बाल्मीकि रामायण की कथा का अपनी धीर वाणी से वाचन करते हुए श्री जयकांत तिवारी उपाख्य रामकिकर जी महाराज ने भक्ति रसभिलाषी जातकों को बताया कि अश्वमेध यज्ञ समस्त इच्छाओं की पूर्ति एवं मोक्ष प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है। इस दौरान उन्होंने राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए किए गए अश्वमेध यज्ञ कर्तव्य का वर्णन किया।
रविवार को महोत्सव की शुरुआत सुबह श्रीरामचरित मानस नवाहन पारायण पाठ से की गई। तत्पश्चात दोपहर तकरीबन ढाई बजे से कथाव्यास श्री शास्त्री जी ने बाल्मीकि रामायण आधारित राम कथा प्रसंग का भक्तों को अमृतपान कराए। कथा कार्यक्रम में काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बता दें कि इस बार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत महोत्सव को अधिक विस्तार न देते हुए नया बाजार स्थित श्रीसीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के प्रांगण में ही आयोजित किया गया है। आश्रम के महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज ने कहा कि परिस्थिति के अनुकूल आयोजन को सीमित करना बाध्यतता है। - बाल्मीकि रामायण समस्त वेदों का अवतार इस दौरान कथा वाचन करते हुए महाराज जी ने कहा कि जब तक भगवान राम का निरावरण साक्षात्कार नहीं होगा तब तक कल्याण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भगवान राम का निरावरण साक्षात्कार बाल्मीकि रामायण के श्रवण से ही संभव है, जो समस्त वेदों का अवतार है। यह ग्रंथ बाल्मीकि रूपी पर्वत से निकलकर राम रूपी सागर की ओर ले जाने वाली गंगा है। इस दौरान रामकिकर जी महाराज ने श्रद्धालु-भक्तों से कहा कि इसमें स्वयं को समर्पित कर दीजिए और स्वत: आपको यह राम रूपी परमानन्द के सागर तक पहुंचा देगी। भगवान के अधीन ही रहना श्रेष्ठ कार्य है। संत प्रवर ने कहा कि भगवान कि अधीनता न प्राप्त हो तो भागवत के अधीन रहना चाहिए। इस दौरान कथा का रसपान कराते हुए महाराज जी ने प्रभु श्रीराम के जन्म कथा की भावात्मक तरीके से साक्षात्कार कराया।