Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Train Accident: गहराती रात में भयंकर आवाज, कांपते यात्रियों की सहायता को दौड़ पड़े गांव के गांव

    By Jagran NewsEdited By: Narender Sanwariya
    Updated: Thu, 12 Oct 2023 05:51 AM (IST)

    Bihar Train Accident Updated News अचानक तेज आवाज ने सभी को दहला दिया। किसी अनहोनी की आशंका ने आंखों की नींद गायब कर दी। यह जैसे ही पता चला कि ट्रेन दु ...और पढ़ें

    Bihar Train Accident: गहराती रात में भयंकर आवाज, कांपते यात्रियों की सहायता को दौड़ पड़े गांव के गांव
    Bihar Train Accident: गहराती रात में भयंकर आवाज, कांपते यात्रियों की सहायता को दौड़ पड़े गांव के गांव

    HighLights

    1. समाज ने दिखाई मानवता, हर ओर मची थी चीख-पुकार
    2. जेनरेटर लाकर रोशनी की व्यवस्था की, कोई पानी लेकर दौड़ रहा, कोई एंबुलेंस पर चढ़ा रहा
    3. आपदा में अवसर तलाशते एक चोर को जमकर पीटा भी, घंटे भर बाद पहुंच सका प्रशासन

    जयमंगल पांडेय, बक्सर। रात अब गहरा रही थी। पैंट्रीकार के कर्मी यात्रियों को खाना दे चुके थे। लोग खा-पीकर अब सोने की तैयारी में थे। कुछ लोगों ने चादर भी तान ली थी। आनंद विहार से कामाख्या जा रही नार्थ इस्ट एक्सप्रेस पटरियों पर तेज गति में दौड़ती चली जा रही थी कि अचानक तेज आवाज ने सभी को दहला दिया। किसी अनहोनी की आशंका ने आंखों की नींद गायब कर दी। यह जैसे ही पता चला कि ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, वहां अफरातफरी का वातावरण। चारों ओर चीख-पुकार। नीचे घुप अंधेरा।

    बोगियांं हो चुकी थीं बेपटरी

    बोगियां बेपटरी हो चुकी थीं। एसी कोच की हालत यह कि पलटकर डाउन लाइन से अप लाइन पर आ चुकी थी। घटनास्थल रघुनाथपुर स्टेशन की पश्चिमी गुमटी के पास था। चूंकि रात हो चुकी थी, सो पास के बाजार भी बंद हो चुके थे, लेकिन दुर्घटना का समाचार आग की तरह चारों तरफ फैल गया। समाज क्या होता है, मानवता क्या होती है, यह दृश्य यहां दिख रहा था, जब आसपास पंद्रह-बीस किलोमीटर दूर गांवों से भी लोग दौड़ते-हांफते, जिन्हें जो मिला उस साधन से वहां पहुंचने लगे।

    दर्जनों लोग मदद के लिए दौड़े

    यहां तक कि सहायता के लिए दियारा क्षेत्र से भी लोग पहुंच चुके थे। भरखर, रहथुआ, कांट, कैथी, ढोढनपुर, बाबूडेरा आदि गांवों के लोग बड़ी संख्या में पहुंच चुके थे। घायलों की आंखों में आशा की चमक दिखाई पड़ी। ब्रह्मपुर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार यहां सबसे पहले पहुंचे थे। मुख्यालय से प्रशासन की टीम करीब घंटे भर बाद पहुंची। तब तक ग्रामीण यात्रियों को बाहर निकालने में जुट गए थे। यहां घुप अंधेरे के कारण राहत कार्य में परेशानी आ रही थी तो ग्रामीणों ने ही पास से जेनरेटर लाकर वहां रोशनी की व्यवस्था की। कोई पानी लेकर दौड़ रहा है, कोई बच्चों को निकाल रहा है। कोई घायलों को एंबुलेंस पर चढ़ाने पर सहायता कर रहा है। जिससे जो बन पड़ रहा था, वह कर रहे थे। पूर्व मुखिया विनोद ओझा, शैलेश कुमार, विशाल सिंह, आनंद शर्मा आदि दर्जनों लोग सहयोग को दौड़ रहे थे।

    एक ओर लोगों की जान खतरे में थी, उन्हें बचाने का प्रयत्न और दूसरी ओर कुछ ऐसे भी, जो आपदा में अवसर तलाश रहे थे। एक व्यक्ति किसी यात्री का बैग लेकर भाग रहा था, जिस पर लोगों की नजर पड़ गई। उसके हाथ से बैग छीनकर पुलिस को सौंप दिया। उसमें जेवर आदि थे।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- Bihar Train Accident: प्रशासन ने लगाई मदद की गुहार, देवदूत बन पहुंचे स्थानीय, बोले- चीख सुन खड़े हो गए रोंगटे

    पुलिस ने उसे फटकारते हुए चेतावनी देकर छोड़ दिया। सभी घायलों को बचाने में लगे थे, लेकिन वह व्यक्ति जैसे अपनी आदत से लाचार हो। वह फिर सामान पर हाथ साफ करते देखा गया। इस बार लोगों ने उसकी जमकर पिटाई की। एक दृश्य यह भी था। यात्रियों के सामान बिखरे हुए, पटरियां उखड़ी हुईं, बोगियां पलटी हुईं।

    आधी रात तक जमा थी भीड़

    यह दुर्घटना की भयावहता दर्शा रहा थे। रात गहरी होती जा रही थी। 12.30 बजे रात तक भीड़ जमी थी। दानापुर की रहने वाली अंजू देवी वाराणसी से ट्रेन पर सवार हुई थीं। उन्हें क्या पता था कि थोड़ी देर बाद ही यह हादसा होने वाला है। उनके परिवार के लोग भी थे। उन्होंने बताया, ट्रेन में काफी भीड़ थी। वे अपनी बेटी और पोते-पोतियों के साथ स्लीपर कोच में गलियारे में खड़ी थीं। ट्रेन ने अचानक तेज झटका खाया तो दूसरे यात्री उन पर गिर पड़े और रुकते ही सभी एक-दूसरे पर पांव रखते कूदने लगे।

    वे भय से कांप रही थीं। जैसे-तैसे बाहर निकलीं। एंबुलेंस पहुंच चुकी थी। घायलों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रघुनाथपुर में इलाज किया जा रहा था। बक्सर भी ले जाया जा रहा था। गंभीर रूप से घायल हुए यात्रियों को पटना भेजा गया। बक्सर स्टेशन पर लोगों की भीड़ हो चुकी थी। ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया था। रात के एक बजे तक सायरन बजाती एंबुलेंस दौड़ रही थी, हालांकि इस समय तक स्थिति बहुत हद तक नियंत्रित की जा चुकी थी।

    यह भी पढ़ें- Bihar Train Accident Live Updates: बिहार के बक्सर में आनंद विहार-कामाख्या एक्सप्रेस हादसे में अब तक छह की मौत, NDRF का बचाव अभियान जारी

    बिहार रेल हादसे पर सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को घेरा

    बक्सर में नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस के हादसे में चार लोगों की मौत पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने शोक प्रकट किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद ही रेलवे ने तत्काल राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया। कोई भी हादसा दुखदाई होता है, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस हादसे पर भी राजनीति सूझ रही है। घटना के 12 घंटे के बाद नीतीश कुमार इस हादसे को लेकर संवेदना व्यक्त की जो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है और अब वे नसीहत दे रहे हैं। रेलवे ने तत्काल हादसे में मरने वाले आश्रितों को 10-10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को दो -दो लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने का फैसला किया है। वहीं फंसे यात्रियों को विशेष ट्रेन की व्यवस्था कर रात में ही गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

    बिहार रेल हादसा या साजिश

    बिहार रेल हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठ रहे हैं। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिहार रेल हादसा किसी साजिश का शिकार हुई है? क्योंकि प्रारम्भिक जांच में यह बात सामने आई है कि कई जगहों पर रेल की पटरियां टूटी हुई मिली। हालांकि बिहार रेल हादसे की वजह की सटीक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।