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    300 पेड़ बने बक्सर के 41.52 करोड़ के फोरलेन बाइपास की राह में रोड़ा, डेडलाइन पर मंडराया संकट

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 04:05 PM (IST)

    बक्सर में गोलंबर से ज्योति चौक तक प्रस्तावित फोरलेन बाइपास का निर्माण कार्य पेड़ों की कटाई और वन विभाग को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरण न होने के कारण रुका ...और पढ़ें

    पेड़ों की कटाई के लिए नहीं मिली अनुमति

    पेड़ों की कटाई के लिए नहीं मिली अनुमति

    HighLights

    1. बक्सर बाइपास निर्माण 300 पेड़ों की कटाई के कारण बाधित।

    2. वन विभाग को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरण न होने से अनुमति नहीं।

    3. 41.52 करोड़ की परियोजना, नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य।

    जागरण संवाददाता, बक्सर। शहर के गोलंबर से ज्योति चौक तक प्रस्तावित फोरलेन बाइपास सड़क के निर्माण कार्य पर इन दिनों ग्रहण लग गया है। करीब ढाई किलोमीटर लंबी इस योजना की सबसे बड़ी बाधा सड़क किनारे खड़े पेड़ों की कटाई और वन विभाग को वैकल्पिक भूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाना है।

    इसके अलावा नाला निर्माण के दौरान विद्युत खंभे भी कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं। इन कारणों से निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

    41.52 करोड़ की लागत से बन रहा फोरलेन बाइपास

    यह फोरलेन बाइपास योजना करीब 41.52 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है। इसका निर्माण कार्य फरवरी 2025 में शुरू हुआ था।

    नीतीश कुमार ने राजपुर प्रखंड मुख्यालय से इस परियोजना की घोषणा की थी। विभाग ने नवंबर 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।

    300 पेड़ों की कटाई के लिए नहीं मिली अनुमति

    हालांकि अगस्त 2026 का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद परियोजना का बड़ा हिस्सा अभी अधूरा है, जिससे समय पर कार्य पूरा होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले लगभग 300 पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

    वन विभाग का कहना है कि जब तक पेड़ों के बदले पौधारोपण के लिए वैकल्पिक भूमि औपचारिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक कटाई या स्थानांतरण की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    एक पेड़ के बदले लगाए जाएंगे तीन पौधे

    विभागीय नियमों के तहत एक पेड़ के बदले तीन पौधे लगाए जाएंगे, लेकिन इसके लिए पहले भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

    उधर, नाला निर्माण के दौरान सड़क किनारे लगे विद्युत खंभे भी निर्माण एजेंसी के सामने चुनौती बने हुए हैं।

    हालांकि सड़क निर्माण विभाग का कहना है कि इन खंभों को भविष्य में सड़क के बीच बनने वाले डिवाइडर में स्थानांतरित किया जाएगा।

    केशोपुर में चिन्हित हुई वैकल्पिक भूमि

    इससे यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी और निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं रहेगी। सड़क निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सिमरी प्रखंड के केशोपुर में वैकल्पिक भूमि चिन्हित कर ली गई है।

    भूमि हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होते ही वन विभाग पेड़ों की कटाई या स्थानांतरण की अनुमति देगा। इसके बाद रुके हुए कार्यों में तेजी लाई जाएगी।

    भूमि हस्तांतरण होते ही शुरू होगी कार्रवाई

    वहीं, वन विभाग के क्षेत्र पदाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि विभाग को अब तक वैकल्पिक भूमि औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं की गई है।

    इसी कारण पेड़ों से संबंधित कार्रवाई लंबित है। उन्होंने कहा कि जैसे ही भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी, नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

    नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य, रफ्तार सुस्त

    विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी बाधाएं दूर होते ही बाइपास निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

    हालांकि मौजूदा स्थिति में नवंबर 2026 तक ढाई किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण बाइपास का निर्माण पूरा करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।