बिहार के किसानों की बढ़ी टेंशन! जमीन अपने नाम नहीं तो अटक सकता योजनाओं का लाभ, पंजीकरण में नई शर्तों से हड़कंप
बक्सर में किसान पंजीकरण के नए नियमों से हजारों किसान चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन का उत्तराधिकार बंटवारा और नामांतरण कराना पड़ ...और पढ़ें

अंचल कार्यालय पहुंचे रैयत। जागरण
HighLights
किसान पंजीकरण के नए नियमों से बक्सर के किसान परेशान।
पूर्वजों की जमीन अपने नाम कराने के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर।
सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने का डर सता रहा किसानों को।
संवाद सहयोगी, डुमरांव (बक्सर)। किसान पंजीकरण के लिए लागू किए गए नए प्रावधानों ने बक्सर जिले के हजारों किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
वर्षों से पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन पर खेती करने वाले किसान अब उत्तराधिकार बंटवारा और नामांतरण (म्यूटेशन) कराने के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
सुबह से ही विभिन्न अंचल कार्यालयों में किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं, गांवों में वंशावली, शपथपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों के यहां भी दिनभर भीड़ बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते जमीन उनके नाम नहीं हुई तो वे कृषि विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हो सकते हैं।
अधिकांश जमीन आज भी पूर्वजों के नाम
जिले के अधिकांश गांवों में अब भी बड़ी संख्या में जमीन की जमाबंदी पूर्वजों के नाम दर्ज है। परिवारों में वर्षों पहले आपसी बंटवारा हो चुका है और सभी अपने-अपने हिस्से की खेती भी कर रहे हैं, लेकिन सरकारी अभिलेखों में अब तक नामांतरण नहीं कराया गया है।
नए नियम के तहत किसान पंजीकरण के लिए उत्तराधिकार बंटवारा और सभी वैधानिक हिस्सेदारों की सहमति अनिवार्य होने से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई है।
किसानों ने उठाए सवाल
किसानों का कहना है कि इसी जमीन के आधार पर उन्हें बैंक से कृषि ऋण मिल जाता है, जरूरत पड़ने पर रजिस्ट्री भी हो जाती है और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी हो जाती है।
ऐसे में जब किसान पंजीकरण और सरकारी योजनाओं का लाभ देने की बात आती है, तब उत्तराधिकार बंटवारा और गोतिया-दयाद की सहमति की शर्त लागू करना व्यावहारिक नहीं लगता।
किसान दीपनारायण तिवारी, लक्ष्मण दुबे, गोपाल यादव, दयाशंकर तिवारी, श्याम बिहारी सिंह, अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह और ऋषिकेश तिवारी नियम पर सवाल उठाते हैं।
कहा कि यदि उत्तराधिकार बंटवारा अनिवार्य है तो यही नियम भूमि की बिक्री, रजिस्ट्री और बैंक ऋण की प्रक्रिया में भी समान रूप से लागू होना चाहिए।
इससे किसी एक व्यक्ति द्वारा अन्य वैधानिक हिस्सेदारों की सहमति के बिना जमीन का लेन-देन भी नहीं हो सकेगा।
योजनाओं से वंचित होने का डर
किसानों का कहना है कि किसान पंजीकरण नहीं होने की स्थिति में वे बीज एवं उर्वरक अनुदान, फसल बीमा, डीबीटी, कृषि यंत्र अनुदान तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि नियमों की समीक्षा कर ऐसा व्यवहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे वास्तविक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
क्या कहते हैं अंचलाधिकारी?
चौगाईं के अंचलाधिकारी गौतम कुमार ने कहा कि पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन को अपने नाम कराने, बेचने या बैंक में बंधक रखने के दौरान यदि किसी अन्य वैधानिक हिस्सेदार की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है तो नियमानुसार उस प्रक्रिया पर रोक लग सकती है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों के वैधानिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाता है।