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    बिहार से दिल्ली-लखनऊ का सफर होगा आसान, जून तक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा बक्सर और छपरा

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 03:22 PM (IST)

    बिहार के बक्सर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम जून-जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे पटना-बक्सर एनएच 922 पर 20 किलोमीटर लंबे बॉटलनेक की ...और पढ़ें

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा बक्सर और छपरा

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा बक्सर और छपरा

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    जागरण संवाददाता, बक्सर। बिहार की राजधानी पटना और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच लगभग 20 किलोमीटर लंबे बॉटलनेक की समस्या का काफी हद तक समाधान जून-जुलाई तक हो जाने की उम्मीद है। यह बॉटलनेक पटना–बक्सर एनएच 922 पर बक्सर के पास से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के हैदरिया तक है। इस बीच इंटरमीडिएट लेन सड़क और एक स्थान पर सिंगल लेन पुलिया जाम का बड़ा कारण बनती है।

    पटना–बक्सर एनएच 922 और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच लगभग 17 किलोमीटर लंबे आंशिक एक्सेस कंट्रोल चार लेन हाईवे का निर्माण इस साल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। 

    मांझी घाट तक फोरलेन हाईवे निर्माण

    इस परियोजना की निर्धारित तिथि दिसंबर 2025 थी। यह गाजीपुर जिले के हृदयपुर से करीमुद्दीनपुर, चितबड़ागांव, फेफना, बलिया, बैरिया होते हुए मांझी घाट तक फोरलेन हाईवे निर्माण परियोजना का हिस्सा है। इससे आगरा, लखनऊ, अयोध्या और दिल्ली जैसे शहरों की बिहार से दूरी करीब 15 से 17 किलोमीटर कम होगी और यात्रा समय कम से कम पौन घंटे घट जाएगा। 

    करीमुद्दीनपुर के पास इंटरचेंज प्वाइंट के जरिए बक्सर की तरफ से आने वाले वाहन पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर प्रवेश करेंगे। यह एक्सप्रेसवे बलिया, बक्सर और सारण जिलों को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। अप्रत्यक्ष रूप से भोजपुर, पटना सहित बिहार के अन्य जिलों को भी लाभ मिलेगा।

    85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा

    गाजीपुर–बलिया–मांझीघाट ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल हाईवे परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। एनएचएआई गोरखपुर क्षेत्र के परियोजना प्रबंधक पीयूष अग्रवाल के अनुसार, सड़क पहले ही पूरी हो जानी थी, लेकिन चयनित क्षेत्र बरसात में बाढ़ के पानी से घिर जाता है और भराई के लिए मिट्टी मिलने में कठिनाई होती है। 

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    मानसून के दौरान यह इलाका गंगा और उसकी सहायक नदियों से प्रभावित रहता है, जिससे मिट्टी की उपलब्धता सीमित हो जाती है और निर्माण में देरी हुई।

    बिहार के मांझी घाट तक विस्तृत 

    करीब 5300 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह एक्सप्रेसवे 134.39 किलोमीटर लंबा चार लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जिसे 60 मीटर राइट ऑफ वे के साथ डिजाइन किया गया है। इस पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे। 

    मार्ग पर दो रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेसवे गाजीपुर के हृदयपुर से शुरू होकर बिहार के मांझी घाट तक विस्तृत होगा, जबकि लगभग 17 किलोमीटर लंबा भरौली स्पर इसे सीधे बक्सर और आगे पटना कारिडोर से जोड़ेगा।

    कोई भी घटना होने पर कंट्रोल रूम को स्वतः मिलेगी सूचना

    एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) लगाया जाएगा, जिसमें सीसीटीवी कैमरे, दुर्घटना पहचान प्रणाली, वैरिएबल मैसेज साइन और इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। इससे यातायात सुरक्षित होगा और आपात स्थिति में त्वरित सहायता संभव हो सकेगी।

    बक्सर में निर्माणाधीन तीन लेन पुल बनेगा अहम कड़ी

    इस हाईवे नेटवर्क से जुड़ने के लिए बक्सर में तीन लेन का नया पुल निर्माणाधीन है। फिलहाल गंगा पर दो लेन का एक पुल चालू है, जबकि दो लेन का एक पुराना पुल भी मौजूद है, जिसकी हालत जर्जर हो रही है और उस पर केवल हल्के वाहनों की अनुमति है। नया पुल चालू होने के बाद भारी वाहनों का दबाव कम होगा और एक्सप्रेसवे से सीधे सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।

    हमारी कोशिश है कि जून तक इस परियोजना को पूरा कर लिया जाए। परियोजना का 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कुल चार अलग-अलग खंडों में निर्माण चल रहा है, जिनमें एक भरौली स्पर है, जिसके माध्यम से बक्सर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। — पीयूष अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश