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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Cyber Crime in Bihar: 'मैं बैंक से बोल रहा हूं, खाते में केवाईसी सुधार करना है'; अधिकारी बनकर अधिवक्ता के खाते से उड़ाए हजारों रुपये

    By Ranjit Kumar PandeyEdited By: Mukul Kumar
    Updated: Wed, 29 Nov 2023 03:27 PM (GMT+05:30)

    हैलो ! मैं बैंक अधिकारी बोल रहा हूं। आपके खाते में केवाईसी सुधार करना है। यह कहकर साइबर बदमाशों ने वकील के खाते से रुपये उड़ा लिए हैं। पैसा निकासी का म ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
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    HighLights

    1. बैंक अधिकारी बनकर अपराधियों ने लगाया खातेधारी को चूना
    2. मेहनत की गाढ़ी कमाई पर गड़ी है साइबर अपराधियों की नजर

    संवाद सहयोगी, डुमरांव (बक्सर)। हैलो ! मैं बैंक अधिकारी बोल रहा हूं। आपके खाते में केवाईसी सुधार करना है। पीडीएफ का लिंक भेज रहा हूं, इसे एक बार जांच कर लीजिए। पीडीएफ लिंक ओपन नहीं हुआ तो खातेधारी ने एटीएम कार्ड से संबंधित सारी जानकारी शेयर कर दी।

    इसके बाद साइबर अपराधियों ने खाताधारी के एसबीआई अकाउंट से 79 हजार रुपए निकाल लिया। पैसा निकासी का मैसेज आने के बाद स्थानीय नगर के ठठेरी बाजार निवासी और अधिवक्ता शंभूशरण नवीन के पैरों तले जमीन खिसक गई।

    आगे की कार्रवाई में जुटी पुलिस 

    तत्काल इसकी सूचना डुमरांव पुलिस के साइबर सेनानी ग्रुप में देने के बाद डीएसपी अफाक अख्तर अंसारी आवश्यक सुझाव देते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गए।

    मिली जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता शंभूशरण नवीन कुछ दिन पहले दिल्ली गए हैं। मंगलवार को एससी शर्मा नामक व्यक्ति ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए इनके नंबर पर फोन किया और केवाइसी में सुधार करने के लिए पीडीएफ का लिंक भेजा।

    अपराधी पब्लिक को लगा रहे चूना 

    फर्जी बैंक अधिकारी ने अपने वाट्सएप के प्रोफाइल पर बैंक अधिकारियों के साथ ग्रुप फोटो भी लगाई है। यह देखकर अधिवक्ता को पूरा विश्वास हो गया और लिंक ओपन नहीं हुआ तो एटीएम और खाता नंबर से संबंधित पूरी जानकारी शेयर कर दी।

    कुछ ही देर बाद खाते से पैसा निकासी का मैसेज आया, तो होश उड़ गए। यहां बता दें कि फिलहाल साइबर अपराधियों की सक्रियता से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। साइबर अपराधी नया-नया तरीका अपनाकर आम पब्लिक को चूना लगा रहे हैं।

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    गाढ़ी मेहनत की कमाई गंवाने के बाद लोग रोते-तड़पते हैं। इसके बाद प्राथमिकी भी दर्ज होती है और फिर मामला धीरे-धीरे शांत हो जाता है। नतीजतन साइबर अपराधियों के मनोबल पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।

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