26 जुलाई से चातुर्मास: 4 महीने तक भगवान शिव के हाथ होगी सृष्टि की कमान, इन बातों का रखें ध्यान
देवशयनी एकादशी 26 जुलाई को है, जिसके बाद चातुर्मास शुरू होगा और भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित ...और पढ़ें

20 नवंबर की देवोत्थान एकादशी तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक (AI Generated Image)
HighLights
26 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास का आरंभ।
भगवान विष्णु योगनिद्रा में, शिव संभालेंगे सृष्टि का कार्यभार।
मांगलिक कार्य वर्जित, व्रत-पूजा-पाठ का विशेष महत्व।
गिरधारी अग्रवाल, बक्सर। शनिवार को देवशयनी एकादशी के बाद 26 जुलाई से सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र चातुर्मास प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले 4 महीने तक सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं।
इसी कारण चातुर्मास के दौरान भगवान शिव एवं उनके परिवार की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। यह पवित्र अवधि देवोत्थान एकादशी (20 नवंबर) तक चलेगी।
प्रसिद्ध कर्मकांडी आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री 'साहेब पंडित' के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई (शुक्रवार) को प्रातः 10:10 बजे होगा, जो 25 जुलाई (शनिवार) को दिन में 11:58 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि होने के कारण श्रद्धालु शनिवार को स्नान, ध्यान, भगवान विष्णु की पूजा एवं एकादशी व्रत का पालन कर सकते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाएगा।
धर्मशास्त्रों के अनुसार चातुर्मास वर्षा ऋतु का चार माह का पवित्र काल है। इस अवधि में भगवान विष्णु समस्त देवी-देवताओं के साथ योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए विवाह, उपनयन (जनेऊ), मुंडन एवं अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। यह समय व्रत, जप, तप, दान, सत्संग और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
चातुर्मास में आएंगे प्रमुख पर्व:
चातुर्मास के दौरान अनेक प्रमुख पर्व और व्रत मनाए जाएंगे। आषाढ़ की 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा तथा 30 जुलाई से सावन का शुभारंभ हो जाएगा।
इसके बाद 15 अगस्त को हरियाली तीज, 17 अगस्त को नाग पंचमी, 19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास जयंती, सावन के सोमवार व्रत 3, 10, 17 और 24 अगस्त, 11 अगस्त को मासिक शिवरात्रि तथा 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त 31 अगस्त को बहुला गणेश चौथ, 04 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, 14 सितंबर को हरितालिका तीज, 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा, 23 सितंबर को वामन द्वादशी, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तथा 27 सितंबर से महालय पक्ष प्रारंभ हो जाएगा।
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03 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, 29 अक्टूबर को करवा चौथ, 06 नवंबर को धनतेरस, 08 नवंबर को दीपावली, 13 नवंबर से चार दिवसीय महापर्व छठ, 18 नवंबर को अक्षय नवमी तथा 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ चातुर्मास का समापन होगा।
चातुर्मास में क्या करें, क्या न करें?
- विवाह, मुंडन, जनेऊ एवं अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज करें।
- सात्विक एवं सुपाच्य भोजन ग्रहण करें।
- सावन में पत्तेदार साग, भाद्रपद में बैंगन और दही, आश्विन में दूध तथा कार्तिक में लहसुन और उड़द की दाल का सेवन वर्जित माना गया है।
- तैलीय और अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचें।
- प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर स्नान, जप, ध्यान और पूजा करें।
- वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम करें।
- वाणी, व्यवहार और इंद्रियों पर संयम रखें।
- धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य, कथा-श्रवण और भगवान के स्मरण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।