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Dhanteras 2026: लक्ष्मी-गणेश पर भारी पड़ीं 'ब्रिटिश महारानी', राजा से भी ज्यादा है अंग्रेजी सिक्कों की डिमांड

Published: Fri, 06 Nov 2026 03:50 PM (IST)

धनतेरस पर ब्रह्मपुर के बाजारों में चांदी के सिक्कों की खूब खरीदारी हो रही है, लेकिन गणेश-लक्ष्मी के साथ अंग्रेजी ...और पढ़ें

धनतेरस पर चांदी के सिक्कों में ब्रिटिश हुकूमत का जलवा बरकरार (AI Generated Image)

धनतेरस पर चांदी के सिक्कों में ब्रिटिश हुकूमत का जलवा बरकरार (AI Generated Image)

HighLights

  1. धनतेरस पर चांदी के सिक्कों की भारी खरीदारी।

  2. ब्रिटिश राजा-रानी के सिक्के गणेश-लक्ष्मी से महंगे।

  3. कुछ दुकानदार नए सिक्कों को पुराना बनाकर बेच रहे।

संवाद सहयोगी, ब्रह्मपुर (बक्सर)। सनातन पर्व धनतेरस पर शुभ-लाभ के प्रतीक सिक्कों की खरीदारी में आज भी बाजार में अंग्रेजी हुकूमत का जलवा कम नहीं हुआ है।

धनतेरस के मौके पर बाजारों में चांदी के सिक्कों की खूब खरीदारी हो रही है, लेकिन सनातन की इस प्राचीन परंपरा के बीच एक दिलचस्प और विचारणीय तस्वीर सामने आ रही है।

आजादी के 78 साल बाद भी बाजारों में गणेश-लक्ष्मी के अलावा अंग्रेजी शासनकाल के राजा-रानी के चित्र वाले चांदी के सिक्कों की भारी मांग बनी हुई है। आश्चर्य की बात यह है कि राजा की अपेक्षा रानी के चित्र वाले सिक्के अधिक कीमत पर बिक रहे हैं।

बाजार में प्रचलित कीमतों के अनुसार, 10 ग्राम के रानी के चित्र वाले चांदी के सिक्के की कीमत करीब 3000 रुपए है, जबकि राजा के चित्र वाले सिक्के की कीमत करीब 2700 रुपए बताई जा रही है।

ये भी सभी दुकानों पर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, वर्तमान समय में प्रचलित गणेश-लक्ष्मी के 10 ग्राम के चांदी के सिक्के लगभग 1850 रुपए के हिसाब से बिक रहे हैं। वैसे बाजार में एक और चौंकाने वाली बात भी सामने आई है।

नाम न छापने की शर्त पर कुछ दुकानदारों ने बताया कि ग्राहकों के बीच राजा-रानी के चित्र वाले पुराने सिक्कों की मांग को देखते हुए, नए सिक्कों को कृत्रिम तरीके से पुराना बनाकर बेचा जा रहा है।

धनतेरस पर चांदी के सिक्कों की मांग को देखते हुए बाजार में इस समय ढाई ग्राम से लेकर पांच ग्राम तक के लक्ष्मी-गणेश के सिक्के भी खूब बिक रहे हैं।

आजादी के 78 साल बाद भी गुलामी की मानसिकता

यह बात केवल धनतेरस पर चांदी के सिक्कों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक तौर पर एक वैचारिक सवाल भी खड़ा करती है।

शिक्षक ओंकारनाथ पांडे बताते हैं कि लोग इन पुराने सिक्कों को इनकी पूरी शुद्धता और ऐतिहासिक धरोहर की पहचान के रूप में सहेजने की चाहत के कारण भी पसंद करते हैं।

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