मेडिकल कॉलेज से बाईपास तक: अनुमंडल बनने के दशकों बाद चमका डुमरांव; एक साथ कई मेगा प्रोजेक्ट शुरू
अनुमंडल का दर्जा मिलने के दशकों बाद बक्सर के डुमरांव में विकास की गति तेज हुई है। मेडिकल कॉलेज, औद्योगिक हब, न्यायिक भवन और बाईपास सड़क जैसी कई बड़ी प ...और पढ़ें

5 किलोमीटर लंबी बाईपास के निर्माण से सुधरेगी कनेक्टिविटी। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
200 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज और 500 बेड का अस्पताल निर्माणाधीन।
नावानगर में कोकाकोला, पेप्सी जैसी कंपनियों से औद्योगिक हब।
पांच किलोमीटर लंबी बाईपास सड़क और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण।
अरुण विक्रांत, डुमरांव (बक्सर)। प्रखंड से अनुमंडल का दर्जा मिलने के 34 वर्ष बाद अब डुमरांव में विकास की रफ्तार तेज होती दिख रही है।
22 अप्रैल 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद द्वारा अनुमंडल का उद्घाटन किए जाने के बाद लोगों ने बुनियादी सुविधाओं के सपने देखे थे, लेकिन शुरुआती वर्षों में विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
करीब डेढ़ दशक बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही विकास की तस्वीर बदलनी शुरू हुई और अब एक के बाद एक बड़ी परियोजनाएं आकार ले रही हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा में बड़ा विस्तार
हरियाणा फार्म की लगभग 15 एकड़ जमीन पर अनुमंडल का स्थायी भवन बन चुका है। इसके सामने 60 बेड का अनुमंडलीय अस्पताल निर्माणाधीन है, जो क्षेत्र के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
इसी कड़ी में 200 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज और 500 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। इसके नवंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
वहीं, केसठ प्रखंड में आईटीआई संस्थान की शुरुआत से तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा मिला है।
औद्योगिक हब की ओर बढ़ता कदम
नावानगर के बासुदेवा फार्म क्षेत्र को औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कोकाकोला, पेप्सी और इथनॉल से जुड़ी कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
इसके अलावा, ब्रह्मपुर के पास जेके सीमेंट फैक्ट्री की शुरुआत से औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिली है।
न्यायिक और प्रशासनिक ढांचा मजबूत होने की तैयारी
अनुमंडल बनने के करीब 21 साल बाद व्यवहार न्यायालय की शुरुआत हुई, जो फिलहाल हरियाणा फार्म के पुराने शेड में संचालित है।
नए दो मंजिला न्यायालय भवन और न्यायिक अधिकारियों के आवास के लिए पुराना भोजपुर के पास जमीन चिन्हित की जा चुकी है और उच्च न्यायालय की स्वीकृति का इंतजार है।
सब-जेल निर्माण के लिए भी जमीन की तलाश जारी है।
सड़क और कनेक्टिविटी में सुधार
सड़क जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित पांच किलोमीटर लंबी और दस फीट चौड़ी बाईपास सड़क का काम तेज कर दिया गया है। चार मौजा की जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और मुआवजा वितरण जारी है।
इसके साथ ही, बक्सर-पटना फोरलेन (NH-922) से जोड़ने के लिए पुराने भोजपुर के पास रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए रेलवे को अनापत्ति प्रमाण-पत्र हेतु प्रस्ताव भेजा गया है।
संघर्ष की विरासत
डुमरांव को अनुमंडल का दर्जा दिलाने में कई लोगों का योगदान रहा, जिनमें दिवंगत सत्यनारायण प्रसाद, डॉ. परमेश्वर दयाल, रामेश्वरनाथ तिवारी, काशीनाथ प्रसाद, सरफराज अहमद, मधुसूदन प्रसाद, ललन सिंह यादव, रामजी सिंह यादव, शेरे दिल, सरयू राय और द्वारिका प्रसाद केशरी प्रमुख हैं।
वहीं, अधिवक्ता शंभू शरण नवीन, दशरथ प्रसाद विद्यार्थी, सच्चिदानंद भगत और बीरबल चौधरी जैसे लोगों ने भी इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाई।