मनरेगा अब 'जी-रामजी' : 1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार में बड़े बदलाव; क्या-क्या होगा नया?
ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा अब 'जी-रामजी' के रूप में 1 जुलाई 2026 से लागू होगी, जिससे इसका स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। ...और पढ़ें

मनरेगा की जगह लेगी वीबी जी राम जी योजना। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
जी-रामजी योजना 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह।
ग्रामीण परिवारों को अब 100 की जगह 125 दिन रोजगार।
स्थायी विकास कार्यों और 3 दिन में भुगतान पर जोर।
संवाद सहयोगी, डुमरांव (बक्सर)। ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा अब नए स्वरूप में नजर आने वाली है। जिसके संचालन पर सबकी नजर टिकी है।
वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के रूप में शुरू हुई यह योजना वर्ष 2010 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बनी थी।
अब केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में इसका नया नाम “जी-रामजी” यानी विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) रखा है।
सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार का नया मॉडल बताकर पेश कर रही है। नई योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से लागू किया जाना था, लेकिन पोर्टल और तकनीकी तैयारी पूरी नहीं होने से इसकी शुरुआत टल गई।
तीन दिन में भुगतान और स्थायी विकास कार्यों पर रहेगा फोकस
अब सरकार ने इसे 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू करने की तैयारी की है। इसके लागू होने के साथ ही पुराना मनरेगा कानून समाप्त हो जाएगा।
प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी उमेश चंद्र प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में चल रहे सभी कार्य स्वतः नई योजना में शामिल हो जाएंगे और पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।
100 की जगह 125 दिन मिलेगा मजदूरों को निश्चित रोजगार
पदाधिकारी का दावा है कि “जी-रामजी” केवल मजदूरी आधारित योजना नहीं होगी, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने वाला व्यापक विकास मिशन बनेगी।
नई व्यवस्था में मिट्टी भराई और गड्ढा खोदने जैसे कार्यों के बजाय जल संरक्षण, खेत सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और आजीविका से जुड़े स्थायी ढांचागत कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए वर्किंग शेड निर्माण की भी व्यवस्था होगी। सबसे बड़ा बदलाव रोजगार गारंटी के दिनों में किया गया है।
अब ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 की जगह 125 दिन रोजगार मिलेगा। वहीं मजदूरी भुगतान तीन दिन के भीतर डीबीटी के माध्यम से बैंक खातों में करने का लक्ष्य तय किया गया है। देरी होने पर मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है।