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    कोरोना में पिता को खोया, आर्थिक संकट झेला; अब SSC CGL पास कर बक्‍सर के मनीष बने GST इंस्पेक्टर

    Updated: Wed, 20 May 2026 08:52 AM (IST)

    आर्थिक तंगी और पिता के निधन जैसी मुश्किलों के बावजूद डुमरांव के मनीष सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने कड़ी मेहनत से एसएससी सीजीएल 2025 पास कर जीएसटी इं ...और पढ़ें

    अपनी मां के साथ मनीष सिंंह। जागरण

    अपनी मां के साथ मनीष सिंंह। जागरण

    HighLights

    1. पिता के निधन और आर्थिक तंगी का सामना किया।

    2. कई असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं हारी।

    3. एसएससी सीजीएल पास कर जीएसटी इंस्पेक्टर बने।

    संवाद सहयोगी, डुमरांव (बक्सर)। आर्थिक तंगी, पिता का साया उठ जाना और लगातार असफलताओं का सामना... इन तमाम मुश्किलों के बावजूद डुमरांव के 23 वर्षीय मनीष सिंह ने हार नहीं मानी।

    संघर्ष और मेहनत के दम पर उन्होंने एसएससी सीजीएल 2025 परीक्षा में सफलता हासिल कर जीएसटी इंस्पेक्टर बनकर पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया।

    मनीष की सफलता सिर्फ एक नौकरी पाने की कहानी नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

    बड़का राजपुर के समाजसेवी अमन पांडेय ने मनीष के घर पहुंचकर उन्हें अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती।

    कोरोना से हुई पिता की मौत

    मनीष के जीवन का सबसे कठिन दौर वर्ष 2021 में आया, जब कोरोना की दूसरी लहर में उनके पिता मनोज सिंह का निधन हो गया।

    किसान पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक संकट में घिर गया। ऐसे समय में उनकी मां मीना देवी ने हिम्मत नहीं हारी। जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। 

    कई परीक्षाओं में अंत‍िम रूप से नहीं हुए सफल

    बेटे की पढ़ाई रुकने नहीं दी। सीमित संसाधनों के बावजूद ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था कर उन्होंने मनीष का मनोबल बनाए रखा। डुमरांव में रहकर तैयारी करने वाले मनीष ने सफलता से पहले कई असफलताओं का सामना किया।

    उन्होंने नेवी, एयरफोर्स, कोस्ट गार्ड, बैंकिंग, रेलवे, बिहार दारोगा, सीडीएस, एफकैट और इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी कई परीक्षाएं दीं। कई बार अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद चयन नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी मेहनत और बढ़ा दी।

    आखिरकार उनका संघर्ष रंग लाया और एसएससी सीजीएल 2025 में सफलता हासिल कर वह जीएसटी इंस्पेक्टर बन गए।

    मनीष की यह कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

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