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किसानों की एक फार्मर आइडी के कई फायदे, PM Kisan, KCC से लेकर खाद-बीज के साथ और भी बहुत कुछ

Published: Mon, 31 Aug 2026 05:11 PM (IST)

बिहार में किसानों के लिए फार्मर आइडी अभियान चल रहा है, जिससे पीएम किसान, केसीसी और खाद-बीज जैसी योजनाओं का ...और पढ़ें

इसमें किसानों की एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

इसमें किसानों की एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. फार्मर आइडी से पीएम किसान, केसीसी का लाभ आसान।

  2. खाद-बीज और अन्य कृषि योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

  3. जमीन रिकॉर्ड सुधारना फार्मर आइडी के लिए महत्वपूर्ण।

डिजिटल डेस्क, दरभंगा। खेत में मेहनत करने वाले किसान के लिए अब सिर्फ जमीन का कागज ही पहचान नहीं होगा। सरकार खेती, जमीन और किसान को मिलने वाली योजनाओं की जानकारी को एक डिजिटल पहचान से जोड़ रही है।

इसी कड़ी में उत्तर बिहार के दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण्, पश्चिम चंपारण और शिवहर में भी फार्मर रजिस्ट्री अभियान चल रहा है।

बिहार में अब तक 48.57 लाख किसानों की फार्मर आइडी बन चुकी है। फार्मर आइडी बनने से पीएम किसान, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के साथ खाद-बीज लेने की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को इस डिजिटल पहचान से जोड़ना है।

पीएम किसान में भी दिख सकता है असर

पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त सितंबर के अंत तक या अक्टूबर में आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक तारीख तय नहीं की है।

ऐसे में किसानों के लिए फार्मर आइडी बनवाना महत्वपूर्ण है। योजना से जुड़े रिकॉर्ड में जमीन और किसान की पहचान का सही मिलान नहीं होने पर भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

खाद-बीज लेने में भी होगी सुविधा

फार्मर आइडी किसान की डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी। इससे किसान की जमीन और खेती से संबंधित रिकॉर्ड एक जगह व्यवस्थित होने में मदद मिलेगी। भविष्य में सरकारी स्तर पर खाद, बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ लेने में भी यह पहचान उपयोगी होगी। इससे पात्र किसान की पहचान और योजना के लाभ में पारदर्शिता बढ़ेगी।

केसीसी में नहीं होगी कोई दिक्कत

किसान क्रेडिट कार्ड खेती के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जनवरी के आंकड़ों के अनुसार दरभंगा जिले में करीब 2.11 लाख पीएम किसान पंजीकृत किसानों के मुकाबले लगभग 95 हजार किसान ही KCC का लाभ उठा रहे थे।

जमीन के रिकॉर्ड, एलपीसी और बैंक स्तर की प्रक्रिया कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। फार्मर आइडी से रिकॉर्ड व्यवस्थित होने पर KCC की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

जमीन का रिकॉर्ड सबसे बड़ा पेंच

फार्मर आइडी बनाने में खाता-खेसरा, जमाबंदी, दाखिल-खारिज और परिमार्जन से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। प्रशासन ने लंबित परिमार्जन आवेदनों के शीघ्र निष्पादन पर भी जोर दिया है। जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी रहने पर फार्मर आइडी बनाने में परेशानी हो सकती है।

किसानों के लिए जरूरी कदम

फार्मर आइडी बनने के बाद किसान की पहचान, जमीन और सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड को एक डिजिटल व्यवस्था में जोड़ा जा सकेगा।

ऐसे में किसानों के लिए अभी सबसे जरूरी है कि वे फार्मर रजिस्ट्री में अपना पंजीकरण कराएं और जमीन के रिकॉर्ड में किसी तरह की त्रुटि है तो उसे समय रहते ठीक कराएं। इससे पीएम किसान की आगामी किस्त समेत केसीसी, खाद-बीज और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में संभावित परेशानी से बचा जा सकेगा।