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दरभंगा में 350 साल से नहीं टूटी परंपरा, रनवे में आज भी धूमधाम से मनता है श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

Published: Fri, 04 Sep 2026 05:11 PM (IST)

350 Years Old Tradition : दरभंगा के रनवे गांव में लगभग 350 साल पुरानी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की परंपरा आज भी ...और पढ़ें

रनवे चौक पर पूजा स्थल पर बना भव्य आकर्षण पंडाल। जागरण

रनवे चौक पर पूजा स्थल पर बना भव्य आकर्षण पंडाल। जागरण

संवाद सहयोगी, केवटी (दरभंगा)। Mithila Cultural Heritage : बिहार में दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के रनवे गांव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने का इतिहास करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पुराना है। यह इस क्षेत्र की एक अत्यंत ऐतिहासिक और गहरी सांस्कृतिक धरोहर है।

रनवे गांव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किसी आधुनिक काल की शुरुआत नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा के तहत किया जाता है।

यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसमें रनवे, केवटी सहित आसपास के इलाके के भगवान श्रीकृष्ण भक्त श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं संत-महात्मा बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं।

मिथिलांचल के इस क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान प्राचीन रीति - रिवाजों, पारंपरिक पूजा - पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और मेला भी लगता है, जो सदियों से इस गांव की पहचान बना हुआ है।

बताया जाता है कि बरसों पहले कमलापुरी वैश्य परिवार के बड़े - बुजुर्ग व्यापार के सिलसिले में घर से बाहर निकले और बार-बार इन्हें घाटा होता रहा तो भगवान श्रीकृष्ण ने इन्हें स्वप्न में आकर कहा तुमलोग घर लौटकर मेरी विधिवत पूजा करों तो तुम्हें व्यापार में मुनाफा होगा।

उसके बाद ही आज से करीब कई पीढ़ी पूर्व इन लोगों ने जन्माष्टमी शुरू किया जो अनवरत जारी है। यह बात परिवार के लोग आज भी बताते हैं। यहां पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छुरा-छुरी का कार्यक्रम दिखाया जाता था, धीरे - धीरे यह सब अब बंद हो गया।

इसी छुरा-छुरी को लेकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला देखने के लिए प्रखंड क्षेत्र में चर्चा होते रहता था और नेपाल के अलावा दरभंगा, मधुबनी व समस्तीपुर जिले के दूर-दूर गांव के लोग यहां आते थे।

यहां पर तीन दिवसीय मेला का भव्य आयोजन होता है। मूर्तिकार द्वारा राधा-कृष्ण, नन्द-यशोदा, देवकी-बासुदेव, शिव-पार्वती एवं अन्य देवी-देवताओं के बड़े-बड़े भव्य और आकर्षक प्रतिमा बनाए जाते है। प्रतिमा का दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ गई है।

पंडाल बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

मेले में तरह - तरह के मिठाई, खिलौने, छोटे- बड़े झूला, ब्रेक डांस झूला आदि से पूरी तरह सज गई है। भव्य पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। श्रद्धालुओं पर सीसीकैमरे के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है।

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण एवं अन्य देवी - देवताओं के प्रतिमाओं का दर्शन और पूजा - अर्चना करने में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो इसके लिए पूजा समिति की ओर से पूजा स्थल पर व्यापक व्यवस्था की गई है।