दरभंगा के बथई में डूबा चचरी पुल, 15 किमी का चक्कर काटने को मजबूर हजारों ग्रामीण
दरभंगा के बथई में 4.90 करोड़ रुपये के आरसीसी पुल का निर्माण डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हुआ, जिससे वैकल्पिक चचरी पुल भी पानी में डूब गया है। हजारों ग्रा ...और पढ़ें

लगमा के बथय में नवनिर्मित चचरी पुल के ऊपर पानी। सौजन्य ग्रामीण
HighLights
बथई में 4.90 करोड़ का पुल निर्माण लंबित।
वैकल्पिक चचरी पुल बरसात के पानी में डूबा।
ग्रामीणों को 12-15 किमी अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ रही।
संवाद सहयोगी, तारडीह (दरभंगा)। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगमा पंचायत के बथई गांव स्थित मृत कमला नदी पर 4.90 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है।
ऐसे में लोगों की आवाजाही के लिए बनाई गई वैकल्पिक चचरी पुल भी आवागमन शुरू होने से पहले ही बरसात के पानी में डूब गई। इससे ग्रामीणों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। निर्माण स्थल पर लगे शिलापट के अनुसार पुल निर्माण कार्य 29 फरवरी 2024 से शुरू होकर 28 फरवरी 2025 तक पूरा होना था।
लेकिन निर्धारित समयसीमा समाप्त हुए डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस बीच करीब छह माह पहले विभाग ने वर्ष 2007 में बने लोहे के स्क्रू पाइल पुल को तोड़ दिया।
हालांकि पुल तोड़ने से पहले न तो डायवर्सन बनाया गया और न ही कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया गया। इस कारण बथय व कटमा के ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुलिस चौकी जाने के लिए 12 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
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कई लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं। आरसीसी पुल का निर्माण अभी फाइलों में ही बंद है लेकिन इस बीच विभाग ने चचरी पुल का निर्माण शुरू कराया, लेकिन हल्की बारिश के बाद ही मृत कमला नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल पानी में डूबने लगा है। इससे एक बार फिर लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
दो विधानसभा के हजारों लोगों के लिए लाइफ लाइन थी यह पुल
यह सड़क मनीगाछी के बघात से उजान के गगौली तक जाने वाले मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दरभंगा ग्रामीण और अलीनगर विधानसभा क्षेत्र को जोड़ती है।
मनीगाछी प्रखंड के कटमा पंचायत तथा तारडीह प्रखंड की लगमा पंचायत के हजारों लोगों के लिए यह मार्ग लाइफलाइन मानी जाती है। गांव के मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अब आवागमन पहले से अधिक जोखिम भरा हो गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुल निर्माण की समयसीमा समाप्त हुए डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं तो निर्माण में देरी की जिम्मेदारी किसकी है।
चचरी पुल का निर्माण संवेदक द्वारा किया गया है। हालांकि दोनों और सुरक्षा को लेकर किसी तरह के संकेतक नहीं लगाए गए हैं।
आरसीडी दरभंगा टू के सहायक अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि नदी की गहराई ज्यादा होने के कारण चचरी ज्यादा ऊंची नहीं की जा सकती है।
नदी में पानी बढ़ने के कारण चचरी पर पानी चढ़ा होगा। वैसे नहर डिवीजन से भी वार्ता चल रही है फाटक अगर खुल जाता है तो पानी का स्तर कम किया जा सकता है।
सुरक्षा के लिए संवेदक को दोनों तरफ बोर्ड लगाकर सिर्फ पैदल आने जाने के लिए संकेतक लगाने के साथ चचरी पुल के दोनों और सुरक्षा के लिए रस्सी लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।