दरभंगा के शिक्षा विभाग में बड़ा खेल, डीईओ कार्यालय में भी है उप निदेशक जैसा ‘धनकुबेर’
दरभंगा डीईओ कार्यालय में एक कर्मी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें 20 लाख के रंगरोगन फंड में हेराफेरी और 40 लाख की अतिरिक्त मांग शामिल है।

इस मैटर पर प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
डीईओ कार्यालय कर्मी पर 20 लाख के रंगरोगन फंड में हेराफेरी का आरोप।
जनसहयोग से काम कराकर 40 लाख की अतिरिक्त राशि की मांग।
डेस्क-बेंच आपूर्ति, वाहन किराए में भी बड़े घपले का आरोप।
संवाद सहयोगी, दरभंगा। पटना के मुक्त विद्यालयी शिक्षण परीक्षण बोर्ड के उप निदेशक के ठिकानों पर गुरुवार को विशेष विजिलेंस युनिट के छापों से दरभंगा के जिला शिक्षा कार्यालय को कोई अंतर नहीं पड़ा।
उप निदेशक कुछ महीने पहले तक मुजफ्फरपुर में डीईओ थे। इससे पहले सहरसा डीपीओ, उससे पहले बेतिया डीईओ के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई थी। तीनों धनकुबेर के यहां से मिली राशि की जानकारी पाकर शिक्षक समुदाय भी चौंक पड़े थे।
सरकार की इस कार्रवाई से कुछ पदाधिकारी सचेत भी हुए। लेकिन, स्थानीय डीईओ कार्यालय के शिक्षा परियोजना की गणन शाखा के एक कर्मी धन बटोरने की चाह में इतना अधिक लिप्त है कि उनकी खाल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सम्राट सरकार के छेड़े गए युद्ध से निकली तपिश का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा।
वह दोनों हाथों से बटोरने में लिप्त है। शिक्षा भवन के रंग रोगन के लिए पहले सरकार से 20 लाख रुपए मिले थे। लेकिन, उन्होंने जनसहयोग के नाम पर प्रधानाध्यापक समेत अन्य लोगों से इसे सम्पन्न कर सरकार का 20 लाख डकार लिया।
जन सहयोग से हुई साथ सज्जा के लिए सरकार से और 40 लाख रुपए की मांग कर दी। लूट का यह खेल और अधिक रोचक तब हो गया जब शिक्षा परियोजना के गणन शाखा के उक्त कर्मी ने मिट्टी भराई सहित वायरिंग आदि का कार्य भी लहेरियासराय सैदनगर के अपने एक संबंधी को दे कर सारा माल अपनी ही जेब में रखने की व्यवस्था कर ली।
सेवानिवृत्त शिक्षक सत्यवीर कहते हैं कि उक्त कर्मी ने इससे पहले भी डेस्क बेंच आदि आपूर्ति में करोड़ों की कमाई की। सरकारी राशि के आवंटन और समायोजन को ले प्रखंडों में उसका बड़ा नेटवर्क चल रहा है।
प्रखंड संसाधन केंद्र के लेखापाल से सेटिंग है ही। इसलिए उसके माध्यम से प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को प्रभावित करने में कोई कठिनाई भी नहीं होती।
इतना ही नहीं जिला शिक्षा कार्यालय के पदाधिकारियों के अलावा अन्य कार्यों के लिए जो वाहन भाड़े पर ली जाती है, उसके भुगतान में भी घपला किया जा रहा है।
पदाधिकारी कहीं जाए या नहीं, ईंधन का उतने ही भुगतान ने उक्त कर्मचारी को धनकुबेर बना दिया है। सत्यवीर ने कहा कि सीएम सम्राट की एसयूवी को डीईओ कार्यालय की ओर भी अब देखना ही पड़ेगा।
मेरी जानकारी में तो ऐसा कुछ अभी तक नहीं आया है। अब देखता हूं कि कौन क्या और कैसे कर रहा है।
विद्यानंद ठाकुर - डीईओ, दरभंगा।
