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    दरभंगा में फर्जी शिक्षक नियोजन का 'मास्टरमाइंड' कौन? जांच के घेरे में कई पंचायतें

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    दरभंगा में 2008 और 2010 के फर्जी शिक्षक नियोजन की जांच डीएम के आदेश पर शुरू हो गई है, जिसमें कई पंचायतों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। ...और पढ़ें

    शिक्षा भवन दरभंगा । जागरण

    शिक्षा भवन दरभंगा । जागरण

    HighLights

    1. दरभंगा में 2008-2010 के फर्जी शिक्षक नियोजन की जांच शुरू।

    2. जांच के लिए बुलाए गए पंचायत सचिव सुनवाई में नहीं पहुंचे।

    3. प्रधानाध्यापकों को बिना जानकारी के शिक्षकों ने किया योगदान।

    संवाद सहयोगी, दरभंगा। कुशेश्वरस्थान और बहादुरपुर के अलावा बहेड़ी प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में 2008 तथा 2010 के शिक्षक नियोजन की फर्जी प्रक्रिया आज भी चल रही है।

    फर्जीवाड़ा का रैकेट चलाने वाले इतने सशक्त हैं कि मुखिया को पता नहीं लेकिन शिक्षकों का नियोजन हो गया। प्रधानाध्यापक को पता नहीं और शिक्षक ने विद्यालय में योगदान कर लिया। ऐसा मामला बहादुरपुर के मेकना बेदा, हरिपट्टी, उघरा महापारा, दिलावरपुर पंचायतों से आ रहा है।

    कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के कुशेश्वरस्थान उत्तरी और बहादुरपुर के उघरा महापारा में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी शिक्षक नियोजन की जांच डीएम के आदेश से डीईओ ने शुरू कर दी है।

    सोमवार को डीईओ ने जांच के लिए पंचायत सचिव को सुनवाई के लिए तलब भी किया था। लेकिन पंचायत सचिव सुनवाई में उपस्थित ही नहीं हुए। आरोप यह था कि कुशेश्वरस्थान उत्तरी पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय मुसहरी टोला के प्रधानाध्यापक राज कुमार मंडल ने कहा कि 2006 से 2015 तक वह प्रभार में थे।

    कुल चार शिक्षक पदस्थापित थे। लेकिन एक शिक्षक बाबू प्रसाद को भी देखा गया। उन्होंने जो योगदान दिखाया उस पर मेरा ही फर्जी हस्ताक्षर देखकर दंग रह गया।

    इतना ही नहीं, प्राथमिक विद्यालय नवटोलिया, तरबन्ना में रमेश पोद्दार और मनीषा कुमारी का भी नियोजन इसी फर्जी ढंग से किया गया। जबकि 2010 में पंचायत में शिक्षकों के सभी पदों पर नियोजन हो चुके थे। उस समय की पदस्थापना विवरणी से भी सच्चाई का पता चलेगा।

    सुनवाई में नहीं पहुंचे पंचायत सचिव

    शिक्षा भवन में दोपहर दो बजे से सुनवाई निर्धारित थी। पंचायत सचिव को नियोजन से संबंधित सभी अभिलेख के साथ पहुंचना था। लेकिन वह आए ही नहीं।

    डीईओ ने सुनवाई की शर्त में ही जोड़ दिया था कि सुनवाई के समय पंचायत को आवंटित पद का पत्र देना होगा। आवंटित पद के विरुद्ध प्राप्त आवेदन और उसे दर्ज की गई मूल पंजी, औपबंधिक और अंतिम मेधा सूची भी दिखना होगा।

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    यह ऐसी शर्त है कि कुशेश्वरस्थान उत्तरी क्या फर्जी शिक्षक नियोजन वाली बहादुरपुर की उघरा महापारा पंचायत में आज के पदस्थापित पंचायत सचिव भी प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे। बहादुरपुर की उघरा महापारा पंचायत में तो मुखिया के आवेदन के अनुसार डेढ़ दर्जन शिक्षकों का फर्जी नियोजन किया गया है।

    पंचायत सचिव के अभिलेखों के साथ उपस्थित नहीं होने से जांच की प्रक्रिया आज पूरी नहीं हो सकी। अब बीडीओ के माध्यम से पंचायत सचिव को तलब करेंगे।
    - विद्यानंद ठाकुर, जिला शिक्षा पदाधिकारी, दरभंगा।