दरभंगा में किसानों की खेती होगी स्मार्ट, ड्रोन बचाएगा समय-पानी और श्रम
दरभंगा में किसानों को स्मार्ट खेती के लिए एग्री ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। यह तकनीक समय, पानी और ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
एग्री ड्रोन तकनीक से खेती होगी स्मार्ट, समय-पानी की बचत।
दुर्गम खेतों में भी आसान छिड़काव, किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित।
लागत और फसल नुकसान का जोखिम कम होगा।
संवाद सहयोगी, जाले (दरभंगा)। खेत में जलभराव हो, कीचड़ हो या फसल इतनी ऊंची हो कि वहां पहुंचना मुश्किल हो, अब किसानों के लिए इन चुनौतियों के बीच भी फसल पर दवा और पोषक तत्वों का छिड़काव आसान होगा।
एग्री ड्रोन तकनीक से कम पानी, कम समय और कम श्रम में बड़े क्षेत्र में लक्षित छिड़काव किया जा सकेगा। इससे किसानों की लागत घटने के साथ फसल को नुकसान का जोखिम भी कम होगा।
किसानों तक पहुंचेगी नई तकनीक
कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में एग्री ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र के मुख्य विज्ञानी सह अध्यक्ष डा. दिव्यांशु शेखर के निर्देशन में हुए प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। डा. शेखर ने कहा कि एग्री ड्रोन स्मार्ट खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रसार कार्यकर्ता किसानों को इसके फायदे बताकर तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करें।
दुर्गम खेतों में भी आसान छिड़काव
प्रशिक्षण समन्वयक ई. निधि कुमारी ने ड्रोन की कार्यप्रणाली, प्रमुख घटकों, उड़ान, संचालन की सावधानियों और कृषि में इसके उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जलभराव और कीचड़ वाले खेतों में ड्रोन काफी उपयोगी है। ऊंची फसल के साथ मखाना और सिंघाड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी इससे आसानी से छिड़काव किया जा सकता है।
80 से 95 प्रतिशत तक पानी की बचत
प्रक्षेत्र प्रबंधक डा. चंदन कुमार ने बताया कि ड्रोन और फसल के अनुसार प्रति हेक्टेयर करीब 10 से 30 लीटर पानी में छिड़काव किया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार इससे स्प्रे-पानी की 80 से 95 प्रतिशत तक बचत संभव है। कीटनाशी, कवकनाशी, तरल उर्वरक और पोषक तत्वों का लक्षित छिड़काव होने से रसायनों की बर्बादी भी कम होगी।
किसानों की सुरक्षा भी
ड्रोन से खड़ी फसल में प्रवेश करने की जरूरत कम होगी। इससे फसल के रौंदे जाने का जोखिम घटेगा और किसान रसायनों के सीधे संपर्क में आने से भी बच सकेंगे। कम समय और कम श्रम में अधिक क्षेत्र का उपचार होने से खेती को अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
