आग लगी तो बचना मुश्किल, दरभंगा के होटल, अस्पताल और बाजार सुरक्षा मानकों से दूर
दरभंगा में पिछले एक महीने में 32 अग्निकांडों से 3 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, फिर भी कई ...और पढ़ें

दरभंगा में अग्निशमन गाड़ी । जागरण
जागरण संवाददाता, दरभंगा। गर्मी बढ़ने के साथ अगलगी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। पिछले एक माह में बिहार के दरभंगा में 32 अग्निकांड में तीन करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जलकर राख हो चुकी है।
इसके बावजूद शहर के कई होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में भारी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
32 घटनाओं में तीन करोड़ से अधिक का नुकसान
मई और जून के दौरान तापमान बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाओं में तेजी आई है। पिछले एक माह में जिले में 32 अगलगी की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें तीन करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति नष्ट हो गई। आग पर नियंत्रण पाने में अग्निशमन विभाग की अहम भूमिका रहती है, लेकिन विभाग खुद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
होटल और अस्पतालों में नहीं हैं बुनियादी सुरक्षा इंतजाम
शहर के बेंता, अललपट्टी, दरभंगा टावर, शाहगंज, बिरौल और बेनीपुर इलाके में संचालित कई होटल, रेस्ट हाउस, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और जांच केंद्र अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। अधिकांश संस्थानों में अग्निशामक यंत्र, पर्याप्त जल भंडारण और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का अभाव है।
आपातकालीन निकास तक की व्यवस्था नहीं
कई होटलों और रेस्ट हाउस में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता नहीं है। कमरों में आपातकालीन खिड़की, धुएं से बचाव की व्यवस्था, ऑक्सीजन सुविधा और बालू जैसी प्राथमिक सुरक्षा सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में हादसे की स्थिति में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
घनी आबादी वाले इलाकों में बढ़ा खतरा
लहेरियासराय गुदरी बाजार, बाकरगंज, दरभंगा टावर, बेंता और गुदरी जैसे इलाके घनी आबादी वाले हैं। यहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, सहरसा, सुपौल और नेपाल से आने वाले लोग भी इन्हीं क्षेत्रों के होटलों में ठहरते हैं। ऐसे में किसी हादसे का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
पटाखा दुकानों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी
शहर के कई पटाखा दुकानदार भी अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। लहेरियासराय गुदरी बाजार, बाकरगंज और दरभंगा टावर क्षेत्र में संचालित कई दुकानों में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी बताए जाते हैं।
अग्निशमन वाहनों के पहुंचने में भी होगी परेशानी
दरभंगा टावर सहित कई व्यस्त बाजार क्षेत्रों में सड़कें अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से घिरी रहती हैं। होटलों के सामने दुकानें और बाइक खड़ी रहने से अग्निशमन वाहनों के पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। संकरी गलियों के कारण छोटी दमकल गाड़ियों का प्रवेश भी कई जगह संभव नहीं है।
कर्मियों को नहीं मिला अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण
शहर के कई होटल और रेस्ट हाउस के प्रबंधकों तथा कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में शुरुआती बचाव और राहत कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
22 दमकल गाड़ियों के भरोसे पूरा जिला
जिले में वर्तमान में कुल 22 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं। इनमें छह बड़ी और 16 छोटी गाड़ियां शामिल हैं। ये वाहन जिला मुख्यालय के अलावा बिरौल और बेनीपुर अनुमंडल में तैनात हैं। विभाग के पास तीन हाइड्रोलिक गाड़ियां भी हैं, जो 42 फीट तक ऊंचाई पर आग बुझाने में सक्षम हैं।
किराये के जर्जर भवन में चल रहा कार्यालय
दरभंगा का अग्निशमन कार्यालय अभी भी किराये के भवन में संचालित हो रहा है। भवन की स्थिति जर्जर बताई जाती है। विभाग में एक एसडीपीओ, तीन अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी, तीन सब अग्निशमन पदाधिकारी, 11 हवलदार, 85 कांस्टेबल और 26 चालक कार्यरत हैं।
बड़े हादसे से पहले चेतने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि होटल, अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। नियमित जांच, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और आपातकालीन निकास व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना किसी भी बड़े हादसे को रोकना मुश्किल होगा।
अगलगी की घटनाए नहीं हो इसके लिए विभाग की ओर से प्रतिदिन किसी न किसी क्षेत्र में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को भी सजग रहने की जरूरत है ।
चंद्र किशोर पासवान, अग्निशमन पदाधिकारी ,सदर दरभंगा ।
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