दरभंगा के गांव में चल रही थी मिनी गन फैक्ट्री, पुलिस के छापे में खुला बड़ा राज
दरभंगा के कमतौल थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां से तीन देसी पिस्टल, 70 कारतूस और हथियार बनाने के उपकरण जब्त कि ...और पढ़ें

दरभंगा के गांव में चल रही थी मिनी गन फैक्ट्री, पुलिस के छापे में खुला बड़ा राज
संवाद सहयोगी, कमतौल (दरभंगा) । दरभंगा के कमतौल थाना क्षेत्र का एक साधारण सा घर अवैध हथियारों की फैक्ट्री बन चुका था। बाहर से सबकुछ सामान्य दिखता था, लेकिन अंदर देसी पिस्टल तैयार करने का पूरा इंतजाम था। पुलिस की सटीक सूचना पर हुई छापेमारी में हथियार और कारतूस मिले। अब इस अवैध कारोबार की पूरी परतें भी खुलने लगी हैं।
गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
कमतौल थाना क्षेत्र के पौनद गांव में बुधवार को पुलिस ने तकनीकी टीम के साथ घेराबंदी कर संजय कुमार दास के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान घर में चल रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ। मौके से संजय कुमार दास को गिरफ्तार कर लिया गया।
तलाशी में हथियार बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने तीन देसी पिस्टल, चार मैगजीन और 7.64 एमएम की 70 कारतूस बरामद की। इसके अलावा हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली लेथ मशीन, छेनी, हथौड़ी समेत कई असेंबलिंग उपकरण भी जब्त किए गए। घर से 18 लीटर विदेशी शराब और पांच लीटर बीयर भी बरामद हुई।
मुंगेर से आता था कच्चा माल
एसडीपीओ शुभेंद्र कुमार सुमन ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि हथियार बनाने का कच्चा माल मुंगेर से मंगाया जाता था। पौनद गांव में इन्हें असेंबल कर तैयार किया जाता और फिर अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई की जाती थी।
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एक पिस्टल पर मिलते थे पांच हजार रुपये
पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह तैयार की गई प्रत्येक देसी पिस्टल पर पांच हजार रुपये मजदूरी लेता था। इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क के लिए काम कर रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
मुख्य सरगना की तलाश तेज
एसडीपीओ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित ने पूछताछ में अपने आका का नाम और ठिकाना बताया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस अवैध हथियार कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। बरामद हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने हथियार तैयार कर बाजार में खपाए जा चुके हैं और उनका इस्तेमाल किन घटनाओं में हुआ है।