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देश के पहले इमेजिंग सेटेलाइट मिशन में चमके दरभंगा के लाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने इम्तियाज

Published: Sat, 05 Sep 2026 09:03 PM (IST)

Geo Imaging Satellite Eos: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद ने जीएसएलवी एफ-17 रॉकेट के जरिए ईओएस-05 ...और पढ़ें

युवा विज्ञानी इम्तियाज अहमद

युवा विज्ञानी इम्तियाज अहमद

HighLights

  1. इम्तियाज अहमद ने ईओएस-05 सेटेलाइट मिशन का किया नेतृत्व।

  2. दरभंगा के रेवढ़ा गांव के वैज्ञानिक ने बढ़ाया देश का मान।

  3. देश का पहला अत्याधुनिक जियो-इमेजिंग सेटेलाइट स्थापित हुआ।

संवाद सहयोगी, जाले (दरभंगा)। Isro Scientist Imtiaz Ahmad: श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी एफ-17 रॉकेट के जरिए ईओएस-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया गया है।

देश के इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन में दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत रेवढ़ा गांव निवासी युवा विज्ञानी इम्तियाज अहमद ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की अहम जिम्मेदारी निभाई।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में वैज्ञानिक इम्तियाज की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके पैतृक गांव समेत पूरे मिथिलांचल में गर्व की लहर है।

पहला इमेजिंग सेटेलाइट

जियो-ऑर्बिट (भूस्थिर कक्षा) में स्थापित किया गया यह उपग्रह देश का पहला अत्याधुनिक इमेजिंग सेटेलाइट है। उपग्रह के सफल प्रक्षेपण और निर्धारित कक्षा में स्थापित होने की सूचना मिलते ही रेवढ़ा गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

इम्तियाज चार बहनों के बीच इकलौते भाई हैं और वे बीते 12 वर्षों से इसरो में वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

पूर्व सैनिक पिता भावुक

इम्तियाज के पिता मो. कमर आलम पूर्व सैनिक हैं और बेटे की इस गौरवशाली कामयाबी पर उनकी आंखें खुशी के आंसुओं से छलक उठीं।

पिता ने बताया कि इम्तियाज बचपन से ही काफी होनहार था और उसे आसमान में उड़ते विमानों और रॉकेट को देखना बेहद पसंद था। बचपन में जब भी आसमान से रॉकेट गुजरता, वह घंटों तक उसके पीछे छूटने वाले धुएं को निहारता रहता था।

बचपन का सपना सच

अक्सर पढ़ाई छोड़कर रॉकेट देखने के कारण उसे परिजनों से हल्की डांट भी सुननी पड़ती थी। डांट पड़ने पर वह हमेशा दृढ़ विश्वास से कहता था कि वह एक दिन बड़ा होकर रॉकेट जरूर उड़ाएगा।

आज अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और वैज्ञानिक प्रतिभा के बल पर इम्तियाज ने बचपन के उस सपने को पूरी तरह साकार कर दिखाया है।

गांव से की पढ़ाई

वैज्ञानिक इम्तियाज की शुरुआती तालीम गांव के ही रेवढ़ा मध्य विद्यालय में पूरी हुई थी। इसके उपरांत उन्होंने दरभंगा जिला स्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।

आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने पटना साइंस कॉलेज का रुख किया, जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट (विज्ञान) की शिक्षा पूरी की।

तकनीकी शिक्षा और इसरो

इंटर के बाद उन्होंने झारखंड के धनबाद स्थित बिरसा मुंडा प्रौद्योगिकी संस्थान सिंदरी से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके पश्चात उच्च तकनीकी शिक्षा पूरी करने के लिए वे बेंगलुरु पहुंचे, जहां से उनकी प्रतिभा को नई दिशा मिली।

अपनी असाधारण योग्यता के दम पर वे इसरो से जुड़े और आज देश के सबसे प्रतिष्ठित सेटेलाइट मिशन का नेतृत्व कर बिहार का मान बढ़ाया है।