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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    बिहार से लेकर दिल्ली-असम और बंगाल तक डिजिटल ठगी का नेटवर्क, मुख्य आरोपी अजय राय गिरफ्तार

    Updated: Sun, 11 May 2025 05:50 PM (GMT+05:30)

    डिजिटल मुद्रा के नाम पर बिहार से लेकर दिल्ली असम और बंगाल तक करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस के अनुसार बेगूसराय जिल ...और पढ़ें

    बिहार से लेकर दिल्ली, असम व बंगाल तक डिजिटल ठगी का नेटवर्क
    बिहार से लेकर दिल्ली, असम व बंगाल तक डिजिटल ठगी का नेटवर्क

    HighLights

    1. बेगूसराय से संचालित होता था डिजिटल मुद्राओं के नाम करोड़ों की ठगी का खेल
    2. राज्य स्तर पर होता है एक बास, अब तक दस का नाम व पता आया सामने

    जागरण संवाददाता, दरभंगा। डिजिटल मुद्राओं के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले का नेटवर्क बिहार के अलावा दिल्ली, असम व बंगाल तक फैला है। अब तक सैकड़ों लोग ठगी के शिकार हो चुके हैं। पुलिस जैसे-जैसे अनुसंधान कर रही है, शातिरों की परत दर परत करतूत सामने आ रही है।

    बेगूसराय जिले में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को आठ अप्रैल 2024 को गिरफ्तार चकिया थाना क्षेत्र के अमरपुर निवासी अजय कुमार राय चलाता था। पुलिस जब अजय और उसके नेटवर्क की कुंडली को खंगालना शुरू किया तो लगभग 13 माह के बाद कई चौंकाने वाली बात सामने आई है। इससे पुलिस भी अचंभित है।

    पहले तो पुलिस इस ठगी को दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा और सुपौल जिले तक ही मानकर अनुसंधान कर रही थी, लेकिन अब अजय का नेटवर्क पूरे बिहार से लेकर दिल्ली, असम और बंगाल तक फैला हुआ मिला है।

    हर राज्य के लिए अलग बॉस

    पता चला है कि अजय हर राज्य के लिए अलग से एक बॉस को नियुक्त करता था। जो अपने-अपने राज्यों में एक-दो एजेंटों को बहाल करता था। जो अपने नीचे सह एजेंट नियुक्त कराता था। इसकी संख्या दर्जनों में होती थी। मसलन, ठगी के शिकार पीड़ित सिर्फ सह एजेंट को ही जान पाते थे, जो दोस्त अथवा रिश्तेदार ही होते थे।

    इस कारण ठगी का मामला लंबे दिनों तक दबा रहता था। कोई चाहकर भी थाना-पुलिस के पास जाना उचित नहीं समझते थे। लगातार सह एजेंट पर रुपये वापसी के लिए दबाव बनाते थे। ऐसी स्थिति में अपनी जान बचाने के लिए कई सह एजेंट पुलिस के पास जाना उचित समझा और नेटवर्क से जुड़ी पूरी कहानी पुलिस को बयां कर दिया।

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    दिखाया अमीर बनने का सपना

    मधुबनी जिले के राजनगर निवासी मो. नूर आलम परवाना ने बताया कि वह साइबर कैफे चलाता था। पड़ोस का उसका मित्र लक्ष्मी उसके पास आया और रातों-रात अमीन बनने का सपना दिखाया। कहा - 24 घंटे में निवेश राशि को दोगुणा और सात माह में चार गुणा कर दिया जाता है।

    इसके बाद उसकी मुलाकात एक मई 2025 को गिरफ्तार अपने एजेंट मधुबनी जिले के बिस्फी थानाक्षेत्र के चौंहटा निवासी नीतेश कुमार झा से मुलाकात कराई। पूरा प्लान बताया, शुरुआत में यकीन तो नहीं हुआ, लेकिन जब उसे बड़े शहरों में ले जाया गया तो कई राज्यों के हाई प्रोफाइल लोगों को देख यकीन हो गया।

    बताया कि उसे दिल्ली, असम, कोलकाता, गोवा तक ले जाया गया। इसके बाद जो संपत्ति थी उसे तो दांव पर लगाया ही साथ में कर्ज भी ले लिया। अपने मित्रों और रिश्तेदारों को भी भरोसा देकर पूरी की पूरी गाढ़ी कमाई दिला दी।

    बताया कि सिर्फ उसका 25 लाख रुपये डूब गया गया। उसके माध्यम 20 लोगों ने रातों रात अमीर बनने का जो सपना देखा था वह टूट गया। आज कहीं के नहीं रहे।

    बता दें कि इस मामले को लेकर दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थानाक्षेत्र के सिंहवाड़ा निवासी विवेकानंद महाराज ने नौ दिसंबर 2023 को साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उस दौरान एक करोड़ 16 लाख रुपये ठगी करने का मामला सामने आया था। जो अब करोड़ों में पहुंच गया है।

    अनुसंधान में कई नई बात सामने आई है। अन्य राज्यों के नेटवर्क को भी खंगाला जा रहा है। हर पहलुओं की जांच चल रही है। इतनी मोटी रकम को कैसे और कहां खपाया गया है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। बहुत जल्द सब कुछ साफ हो जाएगा। - नवीन कुमार, अनुसंधानक, साइबर थाना दरभंगा

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