मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन का इंतजार कर रहे छात्रों को झटका, पैट-2024 का विज्ञापन रद
राजभवन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पैट-2024 पीएचडी नामांकन को रद्द करने का आदेश दिया है, जिससे 831 सफल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है ...और पढ़ें

यह तस्वीर जागरणआर्काइव से ली गई।
HighLights
राजभवन ने पैट-2024 पीएचडी नामांकन रद करने का आदेश दिया।
831 सफल छात्रों का भविष्य अधर में, नए नियम लागू।
अब यूजीसी-नेट, गेट स्कोर पर होगा पीएचडी प्रवेश।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीएचडी एडमिशन टेस्ट (पैट-2024) को राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए पैट-2024 की अधिसूचना को तत्काल वापस लेने (रद करने) और नए नियमों के तहत नया विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया है।
राजभवन के इस फैसले से परीक्षा पास कर पिछले कई महीनों से नामांकन का इंतजार कर रहे 831 सफल छात्रों के भविष्य पर तलवार लटक गई है।
राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने 15 जुलाई यानी बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलसचिव को जारी कर बताया है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं नियमावली, 2026' के तहत अब पीएचडी में नामांकन मुख्य रूप से यूजीसी-नेट, सीएसआईआर और गेट स्कोर के आधार पर होने हैं। इसके बाद विभागीय शोध समिति (डीआरसी) की ओर से साक्षात्कार लिया जाएगा।
चूंकि पैट-2024 की केवल लिखित परीक्षा हुई थी और इंटरव्यू होना बाकी था, इसलिए यह प्रक्रिया नए नियमों के अनुकूल नहीं है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी मूल विज्ञापन में विषयवार सीटों का कोई ब्योरा नहीं दिया गया था, जो नियमों के खिलाफ था।
राजभवन ने साफ किया है कि केवल लिखित परीक्षा पास कर लेने से छात्रों को नामांकन का कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता, क्योंकि अभी इंटरव्यू और मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
इधर लिखित परीक्षा के सफल अभ्यर्थी आनंद कुमार ने कहा कि हम लोगों ने विज्ञापन के समय भी विश्वविद्यालय के समक्ष पहले रिक्ति जारी करने की मांग रखी थी। लेकिन कुलपति कुछ गलत सलाहकारों के चक्कर में पड़ गए। जिसका खामियाजा हमलोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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उम्मीदों पर फिरा पानी, असमंजस में सफल छात्र
बता दें कि मई 2026 में घोषित पैट-2024 के परिणाम में 23 विषयों के कुल 2,498 परीक्षार्थियों में से 831 अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी।
हाल ही में कुलपति की अध्यक्षता में पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च काउंसिल (पीजीआरसी) की बैठक भी संपन्न हुई थी, जिसमें लगभग 455 शोध-प्रारूपों (सिनाप्सिस) को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद छात्रों को उम्मीद थी कि जल्द ही काउंसिलिंग और नामांकन का शेड्यूल जारी हो जाएगा।
प्रशासनिक सुस्ती के कारण छात्र पहले ही मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, और अब परीक्षा प्रक्रिया रद होने के राजभवन के इस आदेश ने उनकी उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है।
अब राजभवन के निर्देशानुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन को अब पुराने विज्ञापन को वापस लेकर 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश, 2026' और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नए सिरे से फ्रेश विज्ञापन जारी करना होगा। इसके बाद ही नामांकन की नई प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।