मिथिला की हजारों साल पुरानी विरासत का खजाना एक छत के नीचे, दरभंगा में बनेगा 500 करोड़ का म्यूजियम
दरभंगा में 500 करोड़ रुपये की लागत से एक विश्वस्तरीय सांस्कृतिक संग्रहालय प्रस्तावित है, जो मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियों, पेंटिंग और लोककलाओं को एक छत के नीचे संरक्षित करेगा।

सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर इस परियोजना के निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया।
HighLights
दरभंगा में 500 करोड़ का विश्वस्तरीय सांस्कृतिक संग्रहालय प्रस्तावित।
मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियां, पेंटिंग, लोककलाएं होंगी संरक्षित।
सांसद गोपालजी ठाकुर ने निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियों, दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेजों, मिथिला पेंटिंग और लोककलाओं को देखने के लिए अब दुनिया भर के लोगों को एक ही जगह पर इनकी झलक मिल सकेगी।
दरभंगा में 500 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विश्वस्तरीय सांस्कृतिक संग्रहालय इस सपने को साकार करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण जल्द शुरू कराने के लिए दरभंगा के सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्र सरकार से निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया है।
मिथिला की विरासत को मिलेगा नया ठिकाना
सांसद ने पत्र में कहा है कि मिथिला की ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए यह संग्रहालय महत्वपूर्ण साबित होगा। इसमें क्षेत्र की प्राचीन ज्ञान परंपरा, वेद, दर्शन, न्याय, भाषाओं और लोककलाओं से जुड़ी धरोहरों को संरक्षित करने का अवसर मिलेगा। इससे मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिल सकती है।
डिजिटल गैलरी से शोध केंद्र तक
प्रस्तावित संग्रहालय में मिथिला की दुर्लभ पांडुलिपियों, पुरातात्विक अभिलेखों, संगीत, नृत्य और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने की परिकल्पना है। इसके साथ आधुनिक डिजिटल गैलरी, शोध केंद्र और प्रशिक्षण केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वालों को मिथिला की विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
पिछले महीने भी हुई थी चर्चा
सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर संग्रहालय के निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा की थी। अब पत्र के माध्यम से परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने का आग्रह किया गया है।
पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है गति
विश्वस्तरीय संग्रहालय बनने से दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय कारोबार, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को साकार करने के लिए परियोजना का निर्माण शुरू होना और समय पर पूरा होना अहम होगा।
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