Raksha Bandhan 2026 : केले के थंभ से बनी राखी ने जीता बहनों का दिल, 10 हजार से अधिक राखियां बाजार में
रक्षाबंधन के त्योहार पर पूर्वी चंपारण में केले के थंभ से बनी प्राकृतिक डिजाइनर राखियों की मांग तेजी से बढ़ी ...और पढ़ें
HighLights
केले के थंभ से बनी प्राकृतिक राखियों की बढ़ी मांग।
पूर्वी चंपारण में महिलाएं बना रहीं फाइबर की आकर्षक राखियां।
अब तक 10 हजार से अधिक राखियां बाजार में भेजी गईं।
शशिभूषण कुमार, रक्सौल (पूर्वी चंपारण) । रक्षाबंधन के त्योहार में अब कुछ घंटे ही शेष हैं। बाजार में राखियों की दुकानें सज चुकी हैं, जहां विभिन्न प्रकार की राखियां उपलब्ध हैं। इस बार केले के थंभ से निकाले गए फाइबर धागे से बनी प्राकृतिक डिजाइनर राखियों की मांग बढ़ी है। महिलाएं और युवतियां इन राखियों को पसंद कर रही हैं, और ये बाजार में तेजी से बिक रही हैं।
पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड के बैरियाडीह निवासी पवन कुमार श्रीवास्तव की देखरेख में अमिता श्रीवास्तव, काजल कुमारी, निक्की पांडेय, अनिता कुमारी, सीमा श्रीवास्तव और अंजली कुमारी फाइबर धागे से रंग-बिरंगी राखियां तैयार कर रही हैं। पवन ने तैयार राखियों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी स्वयं संभाल रखी है।
खुदरा बाजार में 20 रुपये तक बिक रही राखियां
केले के फाइबर धागे से राखी बनाने में तीन से चार रुपये का खर्च आता है। पवन बाजार के दुकानदारों को 10 से 15 रुपये में राखियां उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि खुदरा दुकानदार इन्हें 15 से 20 रुपये में बेच रहे हैं।
पवन ने बताया कि महिलाओं को राखी बनाने के लिए रंग-बिरंगे धागे उपलब्ध कराए जाते हैं। महिलाएं एक दिन में 50 से 60 राखियां बना लेती हैं और उन्हें प्रति राखी पांच से सात रुपये मिलते हैं। अब तक बाजारों में 10 हजार से अधिक राखियां भेजी जा चुकी हैं।
छह वर्षो से चल रहा राखी बनाने का काम
पवन ने बताया कि उन्होंने 2018 में सूरत के तांती वैली स्थित बनाना प्रोसेसिंग एंड प्रोडक्ट्स को-आपरेटिव सोसाइटी में केले के थंभ से धागा निकालने की प्रक्रिया सीखी थी। लौटने के बाद उन्होंने फाइबर धागा तैयार करने का कार्य शुरू किया।
