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    बिहार में अवैध कारतूस कारखाना का पर्दाफाश, पूर्वी चंपारण में मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तार

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 08:02 PM (IST)

    मोतिहारी पुलिस ने पूर्वी चंपारण में एक बड़े अवैध कारतूस निर्माण गिरोह का पर्दाफाश किया है। छापेमारी में मुख्य सरगना समेत चार गिरफ्तार हुए और भारी मात् ...और पढ़ें

    HighLights

    1. पूर्वी चंपारण में अवैध कारतूस फैक्ट्री का भंडाफोड़।

    2. मास्टरमाइंड समेत चार अपराधी गिरफ्तार, भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद।

    3. मोतिहारी पुलिस ने उत्तर बिहार के नेटवर्क का किया खुलासा।

    संवाद सहयोगी, चकिया (पूर्वी चंपारण)। Bihar DIU FSL Investigation: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से इस वक्त अपराध और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में मोतिहारी पुलिस ने उत्तर बिहार के कई जिलों में फैले अवैध कारतूस निर्माण के एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है।

    कारखाने पर छापा

    पुलिस की संयुक्त टीमों ने रविवार को जिले के चकिया, फेनहारा, मधुबन और गड़हिया थाना क्षेत्रों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस महाऑपरेशन में पुलिस ने भारी मात्रा में बने और अधबने कारतूसों के साथ गिरोह के मुख्य सरगना समेत चार शातिर बदमाशों को धर दबोचा है।

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    बरामदगी के आंकड़े

    चकिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संतोष कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान कारखाने से 1000 से अधिक निर्मित व अर्धनिर्मित कारतूस बरामद किए गए हैं। इसके अलावा दो देसी कट्टा, 303 पिलेट, 1063 पीस खाली कारतूस और 205 पीस जिंदा कारतूस भी जब्त हुए हैं।

    हथियार बनाने के उपकरण

    गहन तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मेटल शीट, सात पीस अर्धनिर्मित मैगजीन, दो अर्धनिर्मित पिस्तौल का बैरल और एक लेथ मशीन भी बरामद की है। साथ ही कारतूस तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला गन पाउडर और भारी मात्रा में खतरनाक रसायन भी मिले हैं।

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    मिले घातक रसायन

    बरामद रसायनों में नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन और चारकोल जैसी सामग्रियां शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल अवैध तरीके से बारूद तैयार करने में किया जाता था। पुलिस ने बताया कि इन खतरनाक सामग्रियों को देखते हुए तुरंत पूरे परिसर को सील कर दिया गया है।

    आरोपियों की पहचान

    गिरफ्तार किए गए बदमाशों में गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह शामिल है, जो फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा मोहन गांव का निवासी है। इसके अलावा गड़हिया का रामबाबू पासवान, मधुबन का वसी आलम उर्फ मुन्ना और रहमत मियां भी पुलिस की गिरफ्त में आए हैं।

    एनएच किनारे ठिकाना

    जांच में खुलासा हुआ है कि बदमाशों ने मौत का सामान बेचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के किनारे स्थित चकिया के ओझा टोला को अपना मुख्य अड्डा बना रखा था। शातिरों ने यहां दयाशंकर ठाकुर से किराए पर मकान लिया था, ताकि किसी को शक न हो।

    विशाल पुलिस टीम

    इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चकिया और पकड़ीदयाल के एसडीपीओ की अगुवाई में पांच थानों की पुलिस को तैनात किया गया था। इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान साक्ष्य जुटाने के लिए जिला खुफिया इकाई (DIU) और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीमें भी तैनात रहीं।

    नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए अपराधियों से पूछताछ में उत्तर बिहार के कई जिलों में फैले इस गिरोह के नेटवर्क की अहम जानकारियां मिली हैं। मुख्य सरगना श्रीकांत सिंह की निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीमें अब भी संभावित ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही हैं।

    पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले में अवैध कारतूस का निर्माण चल रहा है। सूचना पर पुलिस की विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने जिले के चार थानाक्षेत्रों में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान 1000 से अधिक निर्मित अर्द्धनिर्मित कारतूस, बारूद, कई तरह के केमिकल, धातू का प्लेट आदि जब्त किया गया है। चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। गिरोह का नेटवर्क उत्तर बिहार के कई जिलों में है। सभी संबंधित ठिकानों पर छापेमारी चल रही है।

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    स्वर्ण प्रभात, पुलिस अधीक्षक, पूर्वी चंपारण