जागो ग्राहक जागो: शुद्ध सोना बताकर बेची अंगूठी निकली खोटी, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना
Bihar Jewellery News: मोतिहारी जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ज्वेलर्स को सेवा में गंभीर त्रुटि का दोषी पाया है। आयोग ने उपभोक्ता को पुराने आभूषण की वर्तमान ...और पढ़ें

ज्वेलर्स ने आभूषण पर 10 वर्षों की गारंटी दी थी। (AI Generated Image)
HighLights
मोतिहारी उपभोक्ता आयोग ने ज्वेलर्स को दोषी ठहराया।
अशुद्ध सोना बेचने पर ज्वेलर्स पर जुर्माना लगा।
उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति और खर्च का भुगतान।
संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Motihari Consumer Case: मोतिहारी में जिला उपभोक्ता आयोग ने एक चर्चित ज्वेलर्स की सेवा में गंभीर त्रुटि पाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने ज्वेलर्स को पुराने आभूषण की वर्तमान कीमत का भुगतान करने के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
दो माह में भुगतान का निर्देश
आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन दो माह के भीतर करना होगा। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर निर्णय की तिथि से भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।
2012 में खरीदी थी सोने की अंगूठी
मामला नगर थाना क्षेत्र के अगरवा निवासी संजीव कुमार सिंह से जुड़ा है। उन्होंने हेनरी बाजार स्थित मोहन प्रसाद अरविंद कुमार ज्वेलर्स के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था।
परिवाद के अनुसार संजीव कुमार सिंह ने 28 जुलाई 2012 को उक्त दुकान से 2 ग्राम 480 मिलीग्राम वजन की 23 कैरेट सोने की लेडीज अंगूठी 6944 रुपये में खरीदी थी। ज्वेलर्स ने आभूषण पर 10 वर्षों की गारंटी दी थी।
वापस करने पर बदल गया दावा
उपभोक्ता का आरोप था कि ज्वेलर्स ने खरीद के समय भरोसा दिलाया था कि आभूषण लौटाने पर वर्तमान बाजार मूल्य में केवल 10 प्रतिशत कटौती कर शेष राशि वापस कर दी जाएगी।
लेकिन जब वह 16 अप्रैल 2018 को अंगूठी वापस करने पहुंचे तो दुकान संचालक ने सोने को शुद्ध नहीं बताते हुए उसे लेने से इनकार कर दिया।
आयोग ने माना सेवा में त्रुटि
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष गिरीश मिश्र और सदस्य संजीव कुमार की दो सदस्यीय पीठ ने की। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य देखने के बाद आयोग ने ज्वेलर्स की सेवा में त्रुटि मानी।
आयोग ने आदेश दिया कि आभूषण की वर्तमान कीमत से 10 प्रतिशत कटौती कर शेष राशि परिवादी को लौटाई जाए। साथ ही मानसिक क्षति और मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का निर्देश दिया गया।