चकिया में शातिर बदमाशों को पनाह देना पड़ा भारी, संत तिवारी का पूरा परिवार सलाखों के पीछे; घर बना पुलिस छावनी
चकिया के सिहोरवा गांव में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें दो अपराधी मारे गए और एक एसटीएफ जवान शहीद हो गया। ...और पढ़ें

चकिया में शातिर बदमाशों को पनाह देना पड़ा भारी
HighLights
मुठभेड़ में दो बदमाश ढेर, एक एसटीएफ जवान शहीद।
बदमाशों को पनाह देने पर संत तिवारी परिवार गिरफ्तार।
संत तिवारी का घर पुलिस छावनी में तब्दील।
संवाद सहयोगी, चकिया। थाना क्षेत्र के सिहोरवा गांव में सोमवार की देर रात बदमाशों एवं पुलिस के बीच हुए मुठभेड़ के बाद बुधवार को भी पुलिस घटनास्थल पर मौजूद रही। बता दें कि संत कुमार तिवारी के घर में बदमाशों के छिपे होने की सूचना पर पहुंचे पुलिस के साथ बदमाशों की मुठभेड़ हो गई थी। जिसमें शातिर कुंदन ठाकुर एवं प्रियांशु दुबे की मौत हो गई थी।
एसटीएफ जवान श्रीराम कुमार यादव शहीद हो गए थे। घटना के बाद मंगलवार को पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील रहा। वहीं बुधवार को भी संत कुमार तिवारी के घर के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहे। बताया जाता है कि संत कुमार तिवारी के घर पर ताला लटका है।
संत कुमार तिवारी को तीन पुत्री और एक पुत्र है। उनमें से दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है। एक पुत्री व एक पुत्र अविवाहित है। पुत्र उज्ज्वल कुमार एवं पुत्री रिस्टी कुमारी वर्ग इंटर का छात्र है।
इस घटना में संत कुमार तिवारी, पुत्र उज्जवल कुमार,पत्नी ममता देवी एवं अविवाहित पुत्री रिस्टी कुमारी की गिरफ्तारी के बाद घर में रहने वाला कोई नहीं है। दोनों ब्याही पुत्रियां अपने ससुराल में हैं।
पुत्र उज्जवल के संबंधों के कारण पूरे परिवार के साथ फंस गए संत तिवारी
संत कुमार तिवारी का एक किराना की दुकान है,जिससे जीविका चलाते थे। दिनभर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। भय के कारण ग्रामीण अपना दरवाजा बंद कर रह रहे हैं।
ग्रामीण किराना व्यवसायी ने बताया कि संत कुमार तिवारी काफी मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति हैं। किंतु कुछ समय से इनके पुत्र के कारण कुंदन ठाकुर इनके घर पर आना जाना करता था। कुंदन ठाकुर का घर पड़ोसी गांव में होने के कारण उनके घर व दुकान पर आना जाना तथा दुकान पर खड़ा होकर सिगरेट पीना लगा रहता था।
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परन्तु ग्रामीणों को जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि कुंदन ठाकुर इस घर में पनाह लेकर इतना बड़ा कांड करेगा। संत तिवारी के घर जहां मुठभेड़ हुआ था, वहां खिड़की का कांच गोलियों से टूटा हुआ है। दिवाल पर बने गोलियों की निशान मुठभेड़ की भयावहता को दर्शा रहा है।