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    पूर्वी चंपारण में खूंटा गाड़ने के विवाद में हुई हत्या, पिता-पुत्र सहित छह को आजीवन कारावास

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 04:35 PM (IST)

    पूर्वी चंपारण में 2021 के भूमि विवाद हत्या मामले में कोर्ट ने पिता-पुत्र सहित छह दोषियों को आजीवन कारावास और 33 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आ ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) । पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर थानाक्षेत्र में 2021 में भूमि विवाद में हुई एक व्यक्ति की नृशंस हत्या के मामले में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्या प्रसाद की अदालत ने पिता-पुत्र व दो सगे भाईयों समेत छह अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं प्रत्येक को 33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

    सजा पाने वालों में आदापुर थानाक्षेत्र के बैरिया सिरसिया निवासी बिरेन्द्र सिंह के पुत्र कृष्ण मोहन सिंह, हेवांचल सिंह के पुत्र अनिल सिंह, अनिल सिंह के पुत्र राजीव सिंह, मनोज सिंह के पुत्र टुन्नू सिंह उर्फ चंदन सिंह एवं स्व. साधु सिंह के दो पुत्र वीरेंद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह शामिल हैं। दोषियों में पिता-पुत्र और दो सगे भाई भी शामिल हैं।

     प्रमोद सिंह ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी

    यह मामला आदापुर थाना कांड संख्या 210/2021 से संबंधित है। मामले में स्थानीय निवासी प्रमोद सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार, 25 जुलाई 2021 की सुबह करीब 10 बजे नामजद अभियुक्तों ने उनके घर की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से खूंटा गाड़ रहे थे।

    विरोध करने पर अभियुक्तों ने प्रमोद सिंह की पिटाई शुरू कर दी। बीच-बचाव करने पहुंचे उनके चाचा बृजकिशोर सिंह और भतीजा विवेक सिंह के साथ भी मारपीट की गई। इसी दौरान अभियुक्तों ने बृजकिशोर सिंह के सिर पर खंती से प्रहार कर दिया। हमले में उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

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    मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किए थे। उन पर सत्रवाद संख्या 734/2022 एवं 709/2021 के तहत सुनवाई हुई। मामले में स्पीडी ट्रायल के तहत पर लोक अभियोजक प्रभाष त्रिपाठी ने दस गवाहों की न्यायालय में गवाही कराई।

    दोनों सत्रवाद की सुनवाई पूरी करते हुए न्यायालय ने सभी छह आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 307 एवं 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
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