मोतिहारी के पवन का कमाल: अब केले के रेशों से बनेंगी साड़ियां, शर्ट और पैंट; विदेशों तक है भारी डिमांड
पूर्वी चंपारण के पवन कुमार श्रीवास्तव केले के रेशे से धागा बनाकर अब साड़ी, शर्ट और पैंट जैसे कपड़े तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं। ...और पढ़ें

मोतिहारी के पवन का कमाल: अब केले के रेशों से बनेंगी साड़ियां, शर्ट और पैंट
HighLights
केले के रेशे से कपड़े बनाने की तैयारी।
पवन श्रीवास्तव ने विकसित की नई तकनीक।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर।
शशिभूषण कुमार, मोतिहारी। पूर्वी चंपारण ने एक बार फिर नया प्रयोग किया है। केले के फाइबर धागे से अब साड़ी, शर्ट व पैंट के उत्पादन की तैयारी हो रही है। पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि बैरिया निवासी पवन कुमार श्रीवास्तव केले के थंभ से फाइबर धागा निकालकर राखी, योग मैट, टी पैड, पर्स, टोपी, सजावटी सामान सहित कई तरह की सामग्री बना चुके हैं।
अब वे हस्त करघा लगाकर कपड़ा तैयार करने में जुटे हैं। थंभ से धागा बनाने के बाद मशीन से उसे लंबे धागे में परिवर्तित करते हैं। उन्होंने बताया कि केले की तासीर ठंडी होती है, इस कारण केले के रेशे से बनने वाले कपड़ों की डिमांड देश के साथ-साथ विदेशों में भी खुब है।
पवन ने बताया कि भारत के बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व हैदराबाद में केले के रेशे से तैयार कपड़ों की सर्वाधिक डिमांड है।
उनका कहना है कि केले के रेशे से मोड़े धागे तैयार हो रहे है जो छोटे-छोटे पार्ट में होते है। अब उन्होंने उसे लंबा करने की तकनीक स्वयं विकसित की है। वे स्वयं छोटे रेशे को लंबे धागे में परिवर्तित करने लगे हैं।
चिरैया के मधुबनी आश्रम में केले के रेशे से तैयार हुआ कपड़ा
पवन ने बताया कि केले के रेशे से वे धाग काफी दिनों से बना रहे थे। उसी धागे से उन्होंने राखी, पूजा आसीन, योगा मैट, चटाई, पर्स, सजावटी समान आदि बनाया, लेकिन कुछ अलग करने की ललक अभी मीटी नही थी।
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इस बीच मोतिहारी के एक कार्यक्रम में चिरैया मधुबनी आश्रम के बुनकर ज्योत नारायण सिंह से उनकी मुलाकात हुई। काफी देर बातचीत के बाद नारायण सिंह ने उन्हें केले के रेशे लेकर चिरैया आश्रम आने को कहा।
पवन अपना तैयार धाग लेकर चिरैया पहुंचे। यहां केले के रेशे से दो बाइ चार का कपड़ा तैयार किया। बताया कि कपड़ा बनाने में ताना सिल्क का और बाना केले के फाइबर धागे का उपयोग किया गया।
केले के रेशे से तैयार कपड़ा से बनाया रूमाल
पवन ने बताया कि चिरैया में तैयार दो बाइ चार के कपड़ा को उन्होंने कई जगह दिखाया। इसके लिए वे भागलपुर भी गए। इस बीच उन्होंने तैयार कपड़ा से रूमाल बनाने की सोंची और उससे चार रूमाल तैयार किया। इसबीच फाइबर धागा से कपड़ा तैयार करने की तकनीक जानने वे भागलपुर पहुंचे।
वहां कई जगहों का भ्रमण कर लोगों को जानकारी इकट्ठा की। फिर पूर्वी चंपारण में ही हस्त करघा के माध्यम से कपड़ा तैयार करने की सोंच के साथ लौट गए।
दो से तीन महीने में पहुंचेगी नई तकनीक वाली हस्त करघा
पवन कहते हैं कि उन्होंने भागलपुर से नई तकनीक की हस्त करघा की बात की है। आने वाले दो से तीन महीने में नई तकनीक की मशीन उपलब्ध हो जाएगी। मशीन के माध्यम से वे स्वयं कपड़ा तैयार करेंगे और लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।
पवन ने बताया कि अबतक दो दर्जन से अधिक लोग उनसे केले के थम से फाइबर धागा बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके है। बताया कि जब हस्त करघा पहुंचेगी तो वे स्वयं सभी से मिलकर धागा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।