मोतिहारी-शिवहर सीमा पर स्थित बेलवा डैम से छोड़ा गया पानी, बागमती की पुरानी धारा में लौटी रौनक
Bihar Farmer Irrigation: पूर्वी चंपारण और शिवहर की सीमा पर स्थित बेलवा डैम से पानी छोड़ने के बाद बागमती नदी की पुरानी धारा का जीर्णोद्धार पूरा हो गया ...और पढ़ें

रविवार को शिवहर की तरफ से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसका उद्घाटन किया है।
HighLights
बेलवा डैम से पानी छोड़ा, बागमती की पुरानी धारा में लौटी रौनक।
पूर्वी चंपारण, शिवहर के किसानों को बाढ़ से मिली बड़ी राहत।
फसलों की बर्बादी रुकेगी, सिंचाई आसान होगी, आर्थिक लाभ मिलेगा।
संवाद सहयोगी, पताही (पूर्वी चंपारण)। Bagmati River Restoration: पूर्वी चंपारण और शिवहर जिले की सीमा पर स्थित पताही प्रखंड के लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है।
वर्षों से बागमती नदी की विनाशकारी बाढ़ का दंश झेल रहे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का इंतजार अब खत्म हो गया है, क्योंकि बेलवा डैम से पानी छोड़ दिया गया है।
राहत की किरण
देवापुर पंचायत के समीप बेलवा घाट पर करोड़ों की लागत से निर्मित डैम और बागमती नदी की पुरानी धारा के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा हो गया है।रविवार को शिवहर की तरफ से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद नदी की पुरानी धारा में एक बार फिर रौनक लौट आई है।
ग्रामीणों के चेहरे खिले
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से क्षेत्र के किसानों और आम ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे हैं। लोगों को पूरा भरोसा है कि अब हर साल आने वाली तबाही, फसलों की बर्बादी और इसके कारण होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
दर्जनों गांवों को लाभ
बेलवा डैम और 130 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्जीवित की गई इस पुरानी धारा का सबसे सीधा लाभ पताही प्रखंड के जिहुली, पदुमकेर, देवापुर और खोरीपाकर सहित दर्जनों गांवों को मिलेगा। ये तमाम इलाके हर साल बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब जाते थे।
किसानों में खुशी
स्थानीय किसान सतीश कुमार और रोशन साह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस ऐतिहासिक दिन का इंतजार कर रहे थे। हर साल बाढ़ उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर देती थी, जिससे कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता था।
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सिंचाई होगी आसान
ग्रामीणों का मानना है कि बेलवा घाट पर डैम बनने से अब बाढ़ के पानी का दबाव पूरी तरह से नियंत्रित रहेगा। नदी के जल प्रवाह का बेहतर प्रबंधन होने से न केवल जान-माल का खतरा टलेगा, बल्कि खेतों तक पानी पहुंचने से सिंचाई की व्यवस्था भी बेहद आसान हो जाएगी।
इलाके के लिए वरदान
समीक्षा के अनुसार, यह परियोजना पताही प्रखंड के किसानों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। अब जल संसाधन विभाग के इस कदम से जहां एक तरफ खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी, वहीं दूसरी तरफ पूरे इलाके की आर्थिक स्थिति को भी एक नई मजबूती मिलेगी।