नेपाल की बालेन सरकार ने दी राहत: बॉर्डर से 9 KM तक सफर मुफ्त, 500 रुपये के घरेलू सामान पर भंसार माफ
नेपाल सरकार ने भिस्वा और ठोरी सहित 18 सीमावर्ती भंसार कार्यालयों को फिर से खोलने की मंजूरी दी है, जिससे भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और आवागमन आसान होगा ...और पढ़ें

HighLights
नेपाल ने 18 सीमावर्ती भंसार कार्यालयों को पुनः खोलने की मंजूरी दी।
भिस्वा बॉर्डर पर डिजिटल कस्टम क्लीयरेंस सुविधा अब उपलब्ध।
भारतीय वाहन 9 किमी तक बिना शुल्क नेपाल में प्रवेश कर सकेंगे।
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले व्यापारियों, सीमावर्ती ग्रामीणों और देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। नेपाल सरकार ने वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए भिस्वा और ठोरी सहित 18 सीमावर्ती नाकों पर छोटी भंसार (कस्टम) कार्यालयों के पुनः संचालन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भिस्वा बॉर्डर पर डिजिटल भंसार (कस्टम) कार्यालय का संचालन भी शुरू कर दिया गया है।
इस निर्णय का लाभ पूर्वी चंपारण के रक्सौल बॉर्डर के साथ-साथ पश्चिम चंपारण के सिकटा, भिस्वा और ठोरी क्षेत्र के लोगों को भी मिलेगा। यह फैसला स्थानीय लोगों के लंबे आंदोलन और नेपाल के पर्सा जिला (निर्वाचन क्षेत्र-4) के सांसद की पहल के बाद लिया गया है। इससे भारत-नेपाल के बीच व्यापार, पर्यटन, सामाजिक संपर्क और 'रोटी-बेटी' के पारंपरिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत अब भारतीय चारपहिया वाहनों की कस्टम क्लीयरेंस और प्रवेश अनुमति सीधे भिस्वा सीमा पर ही डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगी। इसके लिए अब लोगों को वीरगंज स्थित मुख्य भंसार कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
क्यूआर कोड और मोबाइल स्कैनर आधारित ऑनलाइन प्रणाली के जरिए कुछ ही मिनटों में वाहन प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। लागू नियमों के अनुसार भारतीय वाहन नेपाल के तराई क्षेत्र में सीमा से लगभग नौ किलोमीटर तक बिना भंसार शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे।
नेपाल सरकार ने आम नागरिकों को राहत देते हुए कस्टम ड्यूटी संबंधी नियमों में भी संशोधन किया है। अब 500 नेपाली रुपये तक के घरेलू उपयोग के सामान को बिना भंसार शुल्क नेपाल ले जाने की अनुमति होगी। साथ ही छोटी भंसार चौकियों को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन और क्यूआर कोड आधारित प्रणाली से जोड़ा जा रहा है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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इस व्यवस्था से शादी-विवाह, बारात और अन्य सामाजिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों को विशेष राहत मिलेगी। सीमावर्ती गांवों के निवासियों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं के आवागमन में सुविधा होगी, जबकि छोटे व्यापारियों को स्थानीय कारोबार बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
भिस्वा, ठोरी, इनरवा, सिकटा तथा आसपास के सीमावर्ती बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों के तेज होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही नेपाल आने-जाने वाले पर्यटकों और धार्मिक यात्रियों के लिए भी औपचारिकताएं पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो जाएंगी।
सीमावर्ती लोगों ने नेपाल सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान बताया है। उनका कहना है कि अब छोटी-छोटी कस्टम प्रक्रियाओं के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे समय, धन और श्रम—तीनों की बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ दोनों देशों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध भी और अधिक मजबूत होंगे।