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प्रलयंकारी बाढ़ के बाद अब संभल रहा नेपाल, मलबे में आशियाना तलाश रहे बेघर, हर कदम पर चुनौती

Published: Sun, 06 Sep 2026 06:11 PM (IST)

Climate Change Himalayas: नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है, ...और पढ़ें

बाढ़ के बाद टूटे घरों से सामान सुरक्षित करने व घर की हालत देखतीं महिलाएं। (फाइल फोटो। जागरण

बाढ़ के बाद टूटे घरों से सामान सुरक्षित करने व घर की हालत देखतीं महिलाएं। (फाइल फोटो। जागरण

नेपाल से लौटकर संजय कुमार उपाध्याय। Nepal Flood Ground Report: नेपाल में आई प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिले की आर्थिकी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

भारी जनहानि के बीच लोग पहले जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे और अब अपनी उजड़ चुकी रोजी-रोटी व ठौर-ठिकानों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

आपदा की इस भीषण चोट के बाद देश की हर धड़कन को संभालने के लिए सरकार व नागरिक मिलकर नई शुरुआत की तैयारी में लगे हैं।

हिम्मत जुटा रहे प्रभावित लोग

प्रभावित इलाकों में अपनों को खो चुके बच्चों और परिवारों का मनोबल बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग व नेपाली सेना की टीमें लगातार काम कर रही हैं।

अपना व्यवसाय और छत गंवा चुके लोगों को मानसिक संबल देकर दोबारा खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन सबके बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने देशवासियों से अपनी सुरक्षा को लेकर सदैव सतर्क और तत्पर रहने की भावुक अपील की है।

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नेपाल  के  नुवाकोट  जिले  में  आई  बाढ़  के  बाद  मची  तबाही  के  बाद  घरों  की  स्थिति। (फाइल  फोटो 

हर घर में डिजास्टर बैग

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन एक कड़वी हकीकत बन चुका है और इसके जोखिम को कम करने के लिए जन-जागरूकता बेहद जरूरी है।

उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि हर परिवार अपने घर में एक जरूरी डिजास्टर बैग तैयार रखे, जिसमें दवाइयां, पट्टी, पानी और सूखा भोजन मौजूद हो।

उन्होंने विश्व समुदाय को इस दर्द से अवगत कराने और साझा जिम्मेदारी निभाने पर विशेष बल दिया।

मलबे में जमीन की तलाश

आपदा में अपना सबकुछ गंवा चुके पीड़ित परिवार अब धीरे-धीरे अपने उजड़े गांवों और बस्तियों की ओर लौटने लगे हैं। बाढ़ के पानी में ढहकर मैदान बन चुके मकानों के मलबे में लोग अपनी पैतृक जमीन की निशानदेही करने में जुटे हैं।

रसुवा के तिमुरे निवासी नीमा तामंग का कहना है कि करीब पांच सौ परिवारों के सामने दोबारा जिंदगी शुरू करने की भारी चुनौती खड़ी है।

तिनका तिनका जोड़ते ग्रामीण

विदुर नगरपालिका क्षेत्र की मन कुमारी बताती हैं कि सात-आठ दशकों में ऐसी तबाही कभी नहीं देखी गई, लेकिन जमीन का टुकड़ा बचा है तो हौसला भी जिंदा है।

वहीं ग्रामीण बहादुर ने कहा कि जो थोड़े-बहुत ढांचे बचे हैं, उन्हें आपस में मिलकर साफ किया जा रहा है और अब पूरी उम्मीदें सरकार के पुनर्वास कदमों पर टिकी हैं। लोग दर्द भुलाकर सामूहिक श्रमदान से जिंदगी को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।

सुरक्षित आवास का मिला भरोसा

राहत शिविरों और होल्डिंग सेंटरों में दिन गुजार रहे हजारों बेघर परिवारों के लिए प्रधानमंत्री ने जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

उन्होंने कहा कि नागरिकों का धैर्य, कर्तव्यबोध और एकता ही इस कठिन दौर से बाहर निकलने का सबसे बड़ा संबल बनेगी। सरकार प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर बुनियादी ढांचे को दोबारा बहाल करने और लोगों के सपनों को नया आकार देने में जुटी है।