रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस वे का बदलेगा एलाइनमेंट, जमीन अधिग्रहण का काम अंतिम चरण में
Bihar Bengal Economic Corridor: रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे और रक्सौल एयरपोर्ट परियोजनाएं उत्तर बिहार को आर्थिक बढ़ावा देंगी, जिससे भारत-नेपाल व्यापार ...और पढ़ें

एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में है। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। Raxaul Haldia Expressway Alignment: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल अब पूर्वी भारत के सबसे बड़े परिवहन और व्यापारिक हब के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
एक तरफ जहां बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ करीब 60 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे (Raxaul-Haldia Expressway) प्रोजेक्ट ने भी रफ्तार पकड़ ली है।
इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स के एक साथ आगे बढ़ने से पूरे उत्तर बिहार सहित भारत-नेपाल व्यापार को एक नई और तेज रफ्तार मिलेगी।
एयरपोर्ट के कारण शुरुआती हिस्से में बदलाव
एक्सप्रेस-वे के रूट को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने बड़ी जानकारी दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट (रूट) में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है। केवल रक्सौल के शुरुआती हिस्से में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जमीन को ध्यान में रखते हुए एक सीमित संशोधन किया गया है।
इसके अलावा बिहार के किसी भी अन्य जिले में एक्सप्रेस-वे के रूट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
मुआवजा पाने का आखिरी मौका
इधर, मोतिहारी जिला प्रशासन ने रक्सौल एयरपोर्ट के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को बेहद तेज कर दिया है। प्रशासन ने उन भूस्वामियों से जल्द से जल्द अपने कागजात जमा करने की अपील की है जिन्होंने अब तक मुआवजा नहीं लिया है। अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यह मुआवजा लेने का अंतिम अवसर है।
अगर निर्धारित समय में राशि नहीं ली गई, तो इसे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARA) कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिसके बाद भुगतान के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने होंगे।
भूस्वामियों की मदद के लिए हर हफ्ते तीन दिन विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। अनुमंडल कार्यालय के अनुसार अब तक 160 से अधिक रैयतों के दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका है। बिहार सरकार इसके लिए 207.70 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि पहले ही जारी कर चुकी है।
यह प्रक्रिया पूरी होते ही 139 एकड़ अतिरिक्त भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को सौंप दी जाएगी, जिससे यहां एटीआर-72 (ATR-72) जैसे बड़े विमानों के उड़ान भरने का रास्ता साफ हो जाएगा।
60 हजार करोड़ का एक्सप्रेस-वे
एनएचएआई के मुताबिक, रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बिहार के 11 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक जाएगा।
एक्सप्रेस-वे से जुड़ने वाले बिहार के जिले:
- पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर
- दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय और लखीसराय
- जमुई, मुंगेर और बांका
इस कॉरिडोर के बन जाने से नेपाल सीमा से लेकर सीधे समुद्री बंदरगाह तक माल ढुलाई बेहद तेज हो जाएगी और लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी आएगी। इससे उत्तर बिहार में उद्योग, पर्यटन और निवेश को एक अभूतपूर्व गति मिलेगी और रक्सौल इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा आर्थिक प्रवेश द्वार (Economic Gateway) बनकर उभरेगा।