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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर बन रहा रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग, चार सितंबर को मनेगा जन्मोत्सव

Published: Thu, 03 Sep 2026 05:55 AM (IST)

Laddu Gopal Puja Vidhi: मोतिहारी में 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जिसमें रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग ...और पढ़ें

मध्यरात्रि 12 बजे खीरे से कान्हा का सांकेतिक जन्म कराने के बाद विशेष पूजा की जाएगी।

मध्यरात्रि 12 बजे खीरे से कान्हा का सांकेतिक जन्म कराने के बाद विशेष पूजा की जाएगी।

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संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Krishna Janmashtami Date: भगवान श्रीकृष्ण का पावन जन्मोत्सव इस वर्ष चार सितंबर शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।

महर्षि गौतम ज्योतिष परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र चंपारण काशी द्वारा संचालित वैदिक गुरुकुलम के संस्थापक आचार्य अभिषेक कुमार दूबे ने बताया कि इस बार रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था।

Janmashtami Parana Niyam

मध्यरात्रि में बाल रूप पूजन

जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर मध्यरात्रि में भगवान के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।

इस पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में मनोहारी झांकियां सजाई जाएंगी और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। मध्यरात्रि 12 बजे खीरे से कान्हा का सांकेतिक जन्म कराने के बाद विशेष पूजा की जाएगी।

पंचामृत अभिषेक और शृंगार

पूजन के लिए पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल कर शंख के जरिए लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाता है।

इसके उपरांत शुद्ध जल से स्नान कराकर प्रभु को नए पीले वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और बांसुरी अर्पित कर झूले में विराजमान कराया जाता है। कान्हा को माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, खीर और पंचमेवा का भोग लगाया जाता है जिसमें तुलसी दल होना अनिवार्य है।

व्रत संकल्प और पारण

भक्त प्रातःकाल स्नान कर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर उपवास का संकल्प लेते हैं। रात्रि में आरती और क्षमा याचना के बाद कान्हा को प्रेमपूर्वक झूला झुलाया जाता है।

इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद नवमी तिथि अथवा रोहिणी नक्षत्र के समापन पर पंजीरी और चरणामृत ग्रहण करके किया जाता है।