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    विराट रामायण परिसर में छोटे सहस्त्र शिवलिंग और नंदी की हुई प्राण प्रतिष्ठा, अब श्रद्धालु कर सकेंगे जलाभिषेक

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 11:44 PM (GMT+05:30)

    चकिया-केसरिया पथ स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि पर छोटे सहस्त्रशिवलिंगम और नंदी की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। अब श्रद्धालु नियमित रूप से जल ...और पढ़ें

    कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में स्थापित सहस्त्र शिवलिंग का छोटा स्वरूप। (जागरण)

    कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में स्थापित सहस्त्र शिवलिंग का छोटा स्वरूप। (जागरण) 

    HighLights

    1. विराट रामायण मंदिर में छोटे सहस्त्रशिवलिंगम की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

    2. महाशिवरात्रि पर अब श्रद्धालु नियमित जलाभिषेक कर सकेंगे।

    3. मुख्य शिवलिंगम के निर्माण के कारण यह व्यवस्था की गई।

    संवाद सहयोगी, कल्याणपुर। चकिया-केसरिया पथ स्थित कैथवलिया जानकी नगर में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के अवसर पर छोटे सहस्त्रशिवलिंगम एवं नंदी भगवान की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इससे अब श्रद्धालु नियमित रूप से जलाभिषेक कर सकेंगे।

    बीते दिन 17 जनवरी को मंदिर की आधार पीठ पर 210 टन वजनी तथा 33 फीट लंबा और 33 फीट मोटा सहस्त्रशिवलिंगम स्थापित किया गया था।

    इसके बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन निर्माण कार्य जारी रहने के कारण वे जलाभिषेक नहीं कर पा रहा था।

    श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को देखते हुए मंदिर समिति ने परिसर में पोखरा के समीप छोटे सहस्त्रशिवलिंगम एवं नंदी भगवान की स्थापना का निर्णय लिया। प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान में ग्रामीण पुरोहित साधु तिवारी वैदिक विधान से बैठे। आचार्य भवनाथ झा ने मंत्रोच्चारण के साथ शिव पूजा संपन्न कराई।

    इस अवसर पर पंडित रामचंद्र झा, शशिनाथ झा, विपिन तिवारी एवं अशोक पाठक ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। पूरे वातावरण में भक्तिमय माहौल बना रहा।

    मंदिर निर्माण कर रही कंपनी के इंजीनियर सम्बोध झा ने बताया कि निर्माणाधीन मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ से कार्य प्रभावित हो रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने अलग स्थान पर छोटे सहस्त्रशिवलिंगम की स्थापना कराई है, ताकि श्रद्धालु आसानी से जलाभिषेक कर सकें और मुख्य निर्माण कार्य भी सुचारु रूप से चलता रहे।

    अब श्रद्धालु नवनिर्मित स्थल पर जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकेंगे, जिससे परिसर में भीड़ का दबाव भी कम होगा।

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