आठ गांवों की 'जल जीवनरेखा' बना बौधाबांध तालाब, गयाजी में खेती; भूजल और आस्था का बना मजबूत सहारा
गया के डोभी प्रखंड का बौधाबांध तालाब जल-जीवन-हरियाली का बेहतरीन उदाहरण बन गया है, जो आठ गांवों के लिए भूजल स्तर बनाए रखने और सिंचाई का प्रमुख स्रोत है ...और पढ़ें

आठ गांवों की खेती को मिल रहा सहारा
HighLights
बौधाबांध तालाब आठ गांवों की जल जीवनरेखा बना।
भूजल स्तर बनाए रखने और सिंचाई में सहायक।
धार्मिक आस्था का केंद्र, सौंदर्यीकरण कार्य जारी।
संवाद सूत्र, डोभी(गयाजी)। गया जिले के डोभी प्रखंड स्थित कुरमावा पंचायत का बौधाबांध तालाब आज ग्रामीण विकास और जल संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण बन गया है। जल-जीवन-हरियाली अभियान की सोच को साकार करता यह तालाब आठ गांवों के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
यह न सिर्फ भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद कर रहा है, बल्कि किसानों की सिंचाई और धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। इन दिनों तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।
आठ गांवों की खेती को मिल रहा सहारा
धरधरी नदी के कैनाल से इस तालाब में पानी पहुंचता है। यही पानी कुरमावा, सुंदर कुम्हारी, मुसेहना, मुसेहनी, छोटकी बेला, कंगाली बिगहा, सबल बिगहा और बूंदा बिगहा समेत आठ गांवों की जरूरतें पूरी करता है।
तालाब की बदौलत इन गांवों का भूजल स्तर करीब 50 से 60 फीट पर स्थिर बना हुआ है। वहीं लगभग 50 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई भी इसी जलस्रोत से होती है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलती है।
सौंदर्यीकरण के साथ बढ़ेगी उपयोगिता
तालाब को और बेहतर बनाने के लिए ग्रामीणों के सहयोग से इसकी गहराई बढ़ाई जा रही है। मेढ़ को मजबूत किया जा रहा है ताकि बरसात के दौरान कटाव न हो और अधिक से अधिक वर्षा जल का संरक्षण किया जा सके।
तालाब के चारों ओर पौधारोपण, मेढ़ पर पेवर ब्लॉक लगाने और लोगों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की भी योजना है।
आस्था का भी बड़ा केंद्र
तालाब के एक किनारे भगवान भास्कर का मंदिर निर्माणाधीन है, जबकि दूसरे किनारे पहले से छठ घाट बना हुआ है।
छठ महापर्व के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां भगवान सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचते हैं। पर्व के समय पूरा क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के माहौल में डूब जाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि यहां स्थायी और आधुनिक छठ घाट का निर्माण कराया जाए ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
जल संरक्षण का प्रेरक मॉडल
बौधाबांध तालाब सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन गया है।
यह तालाब साबित करता है कि यदि ग्रामीण और प्रशासन मिलकर काम करें तो एक जलस्रोत पूरे इलाके की खेती, पर्यावरण और आस्था को नई मजबूती दे सकता है। यही कारण है कि आज यह तालाब आठ गांवों की असली जीवनरेखा बन चुका है।
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ग्रामीणों की भागीदारी बनी मिसाल
तालाब के चारों ओर पौधारोपण कराया जाएगा, मेढ़ पर पेवर ब्लाक लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जाएगी।
ईश्वर चौधरी, मुखिया
यह तालाब गांवों की जीवनरेखा है और इसी के कारण क्षेत्र का जलस्तर स्थिर बना है।
जितेंद्र कुमार सिन्हा, ग्रामीण
ग्रामीण स्वयं मेढ़ को मजबूत करने में जुटे हैं। जिससे तालाब का पानी बेकार नहीं हो सकेगा।
मुकेश कुमार, ग्रामीण
सरकार से तालाब के चारों ओर स्थायी छठ घाट निर्माण की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
नंदकिशोर प्रसाद, ग्रामीण